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शनिवार को भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा का विशेष योग; जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, यात्रा, गृह प्रवेश, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण काम से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय की जानकारी मिलती है।

22 अगस्त 2026 को शनिवार है और इस दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी। शनिवार होने के कारण इस दिन शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं एकादशी तिथि के आगमन के कारण भगवान विष्णु की उपासना भी महत्वपूर्ण रहेगी।

दशमी तिथि के बाद शुरू होगी एकादशी

पंचांग के अनुसार 22 अगस्त को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित तिथि माना जाता है।

ऐसे में श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और ध्यान कर सकते हैं। शनिवार का दिन होने के कारण शनिदेव की आराधना का भी विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव की पूजा से जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों से राहत पाने की कामना की जाती है।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

22 अगस्त को सूर्योदय सुबह 6:09 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:50 बजे होने का अनुमान है। चंद्रोदय दोपहर 2:51 बजे होगा और चंद्रमा रात 1:27 बजे अस्त होगा।

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दिनभर सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर विभिन्न ज्योतिषीय गणनाएं की जाएंगी। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा।

मघा में सूर्य, ज्येष्ठा के बाद मूल नक्षत्र में चंद्रमा

पंचांग के अनुसार 22 अगस्त को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा दोपहर 2:50 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

ज्योतिषीय गणनाओं में नक्षत्रों की स्थिति का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्यों के लिए तिथि और नक्षत्र के साथ योग तथा मुहूर्त का भी विचार किया जाता है।

सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक अमृत काल

22 अगस्त को अमृत काल सुबह 4:55 बजे से 6:43 बजे तक रहेगा। इसे शुभ समय माना जाता है। इस अवधि में पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक गतिविधियां करना शुभ माना जाता है।

वहीं दिन का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:55 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा में अभिजीत मुहूर्त को दिन के महत्वपूर्ण शुभ समयों में शामिल किया जाता है। किसी जरूरी शुभ कार्य के लिए इस अवधि को अनुकूल माना जाता है।

शनिवार को इन अशुभ कालों का रखें ध्यान

पंचांग के अनुसार 22 अगस्त को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 6:09 बजे से 7:44 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 2:04 बजे से 3:39 बजे तक रहेगा।

पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन अवधियों का उपयोग अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और स्थानीय पंचांगों के अनुसार अलग तरीके से किया जा सकता है।

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पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल

22 अगस्त को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहने की बात पंचांग में कही गई है। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल के समय संबंधित दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी आवश्यक कारण से पूर्व दिशा की यात्रा करनी पड़े तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है। हालांकि ऐसे उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में ही देखा जाता है।

शनिवार को शनिदेव के साथ विष्णु पूजा भी खास

22 अगस्त शनिवार होने के कारण शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालु शनिदेव को सरसों का तेल, काला तिल और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित कर सकते हैं। वहीं एकादशी तिथि शुरू होने के कारण भगवान विष्णु की उपासना भी की जा सकती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है, जबकि शनिदेव की आराधना जीवन की बाधाओं से मुक्ति और न्याय की प्राप्ति के लिए की जाती है।

22 अगस्त का पंचांग एक नजर में

दिन: शनिवार
तिथि: शुक्ल पक्ष दशमी, तड़के 2 बजे तक; इसके बाद एकादशी
सूर्योदय: सुबह 6:09 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:50 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 2:51 बजे
चंद्रास्त: रात 1:27 बजे
सूर्य नक्षत्र: मघा
चंद्र नक्षत्र: ज्येष्ठा, दोपहर 2:50 बजे के बाद मूल
सूर्य राशि: सिंह
चंद्र राशि: वृश्चिक
योग: विष्कम्भ
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:55 बजे तक
अमृत काल: सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक
राहुकाल: सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 6:09 से 7:44 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 2:04 से 3:39 बजे तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा

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आस्था के साथ पंचांग को समझने का दिन

22 अगस्त का दिन धार्मिक दृष्टि से शनिवार और एकादशी तिथि के संयोग के कारण महत्वपूर्ण रहेगा। सुबह अमृत काल और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त जैसे शुभ समय उपलब्ध हैं, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समयों में नए कार्य शुरू करने से बचने की पारंपरिक सलाह दी जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा कर सकते हैं।

 

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