नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण निर्णय से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। हिंदू पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य खगोलीय गणनाओं पर आधारित पारंपरिक काल-गणना पद्धति है।
12 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि सुबह 7:46 बजे तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार और डोल ग्यारस का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना शुभ और फलदायी माना जाता है।
शनिवार को सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
पंचांग के अनुसार 12 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:16 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:30 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 7:07 बजे और चंद्रास्त शाम 7:13 बजे होगा।
इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से तिथि और नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
अभिजीत मुहूर्त में कर सकते हैं शुभ कार्य
12 सितंबर को दोपहर 3:09 बजे तक शुभ योग रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ होगा। दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इस दौरान महत्वपूर्ण और शुभ कार्यों की शुरुआत करना अनुकूल माना जाता है।
वहीं अमृत काल सुबह 5:49 बजे से 7:23 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को भी शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचने की मान्यता
शनिवार को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:51 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 6:16 बजे से 7:48 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 1:54 बजे से शाम 3:26 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे समयों में नए या महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
सूर्य सिंह और चंद्रमा कन्या राशि में
पंचांग के अनुसार शनिवार को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा। ग्रहों की स्थिति के आधार पर ज्योतिषीय गणनाएं की जाती हैं और इन्हीं के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय तथा विभिन्न योगों का आकलन किया जाता है।
पूर्व दिशा में रहेगा दिशाशूल
12 सितंबर को पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व यानी ईशान दिशा में दिशाशूल रहने की बात पंचांग में कही गई है। ज्योतिष और वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी कारण से इन दिशाओं में यात्रा करना आवश्यक हो, तो मान्यताओं के अनुसार कुछ पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है।
भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस तिथि पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप और डोल ग्यारस के पर्व का धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु इस अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
इस प्रकार 12 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ पंचांग की गणनाओं के लिहाज से भी विशेष रहेगा। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल को ध्यान में रखा जा सकता है, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए कार्य शुरू करने से पारंपरिक रूप से परहेज किया जाता है।

