नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाया कि ब्रिक्स समिट को लेकर विपक्ष की ओर से नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। पात्रा ने 2011 और 2012 में प्रकाशित कुछ अखबारों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारत को ब्रिक्स का कमजोर सदस्य बताया जाता था, जबकि आज भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत भूमिका में खड़ा है।
‘नकारात्मकता फैलाने की कोशिश’ का लगाया आरोप
संबित पात्रा ने कहा कि आज जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तब कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों की ओर से नकारात्मकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पुराने रिकॉर्ड का आईना दिखाने की जरूरत है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पिछले वर्षों में भारत की वैश्विक स्थिति में कितना बदलाव आया है।
उन्होंने अपने वीडियो संदेश में ब्रिक्स को लेकर वर्ष 2011 और 2012 में प्रकाशित दो प्रमुख अखबारी लेखों का उल्लेख किया।
2012 की रिपोर्ट का हवाला, भारत को बताया गया था सबसे कम आकर्षक सदस्य
भाजपा नेता ने वर्ष 2012 की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उसकी हेडलाइन का उल्लेख किया, जिसमें भारत को वैल्यूएशन के लिहाज से सबसे कम आकर्षक ब्रिक्स सदस्य बताया गया था। पात्रा के मुताबिक, रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स के चेयरमैन और ब्रिक्स शब्द को लोकप्रिय बनाने वाले अर्थशास्त्री जिम ओ’नील का इंटरव्यू भी शामिल था।
पात्रा ने बताया कि इंटरव्यू में ब्रिक्स देशों की आर्थिक संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया था और यह पूछा गया था कि क्या ब्राजील सबसे मजबूत तथा भारत सबसे कमजोर ब्रिक्स देश है।
चीन को पहले और भारत को चौथे स्थान पर रखने का किया उल्लेख
संबित पात्रा ने जिम ओ’नील के कथित आकलन का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भारत, चीन और रूस के लिए पिछली अवधि जैसी तेज विकास दर बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा था। उन्होंने बताया कि वैल्यूएशन के लिहाज से चीन को सबसे आकर्षक और भारत को तुलनात्मक रूप से सबसे कम आकर्षक बताया गया था।
पात्रा के अनुसार, उस आकलन में चीन को पहले, ब्राजील को दूसरे, रूस को तीसरे और भारत को चौथे स्थान पर रखा गया था। उन्होंने कहा कि उस समय भारत की आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई और बाजार की चिंताओं को इसके पीछे प्रमुख कारणों के तौर पर देखा जा रहा था।
‘भारत को इंडोनेशिया रिप्लेस कर दे तो आश्चर्य नहीं’
संबित पात्रा ने दावा किया कि उस समय की रिपोर्ट में यह तक कहा गया था कि अगर भारत की जगह इंडोनेशिया ब्रिक्स में आ जाए तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि उस दौर की रिपोर्टों का कुल मिलाकर निचोड़ यही था कि भारत में सुधारों की कमी, महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों के कारण देश ब्रिक्स के अन्य देशों की तुलना में पीछे दिखाई दे रहा था।
2011 की रिपोर्ट में महंगाई और कमजोर मुद्रा का जिक्र
भाजपा नेता ने 21 सितंबर 2011 को प्रकाशित एक अन्य लेख का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इसकी हेडलाइन में भारत में उच्च महंगाई और कमजोर मुद्रा का उल्लेख किया गया था और भारत को दूसरे ब्रिक्स देशों से अलग स्थिति में बताया गया था।
पात्रा ने कहा कि उस रिपोर्ट में भारत में महंगाई को गंभीर चिंता का विषय बताया गया था। इसके अलावा करंट अकाउंट डेफिसिट, फिस्कल डेफिसिट और कमजोर बुनियादी ढांचे के बावजूद नए निवेश में रुकावट जैसी समस्याओं का भी उल्लेख था।
‘आज सभी ब्रिक्स राष्ट्राध्यक्ष भारत में हैं’
संबित पात्रा ने पुराने आकलनों की तुलना मौजूदा स्थिति से करते हुए कहा कि 2011-12 में जहां भारत को ब्रिक्स में कमजोर पड़ता हुआ बताया जा रहा था, वहीं आज ब्रिक्स के सभी राष्ट्राध्यक्ष भारत में हैं और देश इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारत ने वैश्विक स्तर पर ऐसी जगह बनाई है, जो पहले दिखाई नहीं देती थी। पात्रा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ विपक्षी नेता और कांग्रेस इस उपलब्धि को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
‘भारत आगे बढ़ रहा है, इसलिए विपक्ष को अपच’
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं और कांग्रेस को ‘अपच’ हो रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में ‘आई’ का मतलब इंडिया है और इस इंडिया में देश की 140 करोड़ जनता शामिल है।
संबित पात्रा ने कहा कि भारत ब्रिक्स के सबसे मजबूत साझेदारों में से एक है और देश को अपनी इस स्थिति पर गर्व है। उन्होंने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि पिछले एक दशक से अधिक समय में वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।

