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मुज़फ़्फ़रनगर में चंद्रशेखर आजाद को रोके जाने पर भड़के आसपा कार्यकर्ता, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: विनोद साहनी हत्याकांड में इंसाफ की मांग

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मुज़फ़्फ़रनगर। उत्तर प्रदेश के गोंडा में विनोद साहनी की हत्या के मामले में न्याय की मांग और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी में रोके जाने के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने रविवार शाम करीब 5 बजे कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश बावरा ने किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए विनोद साहनी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

जिलाध्यक्ष दिनेश बावरा ने कहा कि जब विनोद साहनी के परिवार को इंसाफ नहीं मिल रहा था, तब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने गोंडा जाने का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी में पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। उन्होंने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार दलित और पिछड़े वर्गों के हितों के खिलाफ काम कर रही है।

प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने विनोद साहनी हत्याकांड की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। साथ ही हत्या में शामिल आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। पार्टी नेताओं ने मृतक के परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग रखी।

आजाद समाज पार्टी ने चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी में रोके जाने और उनके साथ कथित रूप से अनुचित तथा प्रोटोकॉल के विपरीत व्यवहार किए जाने का भी विरोध किया। पार्टी की ओर से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। साथ ही दोषी पाए जाने वाले पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई।

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ज्ञापन में कहा गया कि किसी निर्वाचित सांसद अथवा जनप्रतिनिधि के साथ संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी ने पीड़ित परिवार और मामले में आवाज उठाने वाले लोगों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग भी की।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तर से निगरानी कर जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

दिनेश बावरा ने पीड़ित परिवार को दबंगों से सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ शस्त्र उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। हालांकि, इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हो सकता है।

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