मुजफ्फरनगर। श्री गिरधारी लाल जैन मेमोरियल पब्लिक स्कूल में आयोजित सुंदर लेखन प्रदर्शनी ने विद्यालय परिसर को बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और संस्कारों के अनूठे संगम में बदल दिया। प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक, दादा-दादी, परिवारजन और विद्यार्थी पहुंचे। करीब पांच घंटे तक प्रदर्शनी में दर्शकों की निरंतर भीड़ बनी रही। बच्चों की सुंदर लेखनी और उनकी रचनात्मक प्रस्तुतियों को देखकर लोगों के चेहरों पर उत्सुकता, आश्चर्य और गर्व साफ दिखाई दिया।

प्री-नर्सरी से कक्षा आठ तक के करीब 170 विद्यार्थियों ने अपनी लेखन प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी की खास बात यह रही कि अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों की लेखनी में सुंदरता, स्पष्टता और सुघड़ता दिखाई दी। नन्हे बच्चों की कोमल लिखावट से लेकर वरिष्ठ विद्यार्थियों की परिपक्व लेखन शैली तक प्रत्येक पृष्ठ बच्चों की मेहनत, निरंतर अभ्यास और लगन की कहानी बयां कर रहा था।
प्रदर्शनी में तख्ती लेखन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही तख्ती लेखन की परंपरा को बच्चों ने अपनी सुंदर प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। इस पहल ने नई पीढ़ी को पारंपरिक लेखन पद्धति से जोड़ने के साथ ही अभिभावकों और दर्शकों को भी पुरानी यादों से रूबरू कराया।
प्रदर्शनी की विशेषता केवल सुंदर लिखावट तक सीमित नहीं रही। विद्यार्थियों ने अपने लेखों, विचारों और रचनाओं के माध्यम से सदाचार, अनुशासन, माता-पिता के सम्मान, प्रकृति संरक्षण, देशप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और अच्छे संस्कारों से जुड़े संदेशों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस कारण पूरी प्रदर्शनी सुंदर अक्षरों के साथ ज्ञान और संस्कारों का संदेश देती नजर आई।
महात्मा गांधी की वेशभूषा में बच्चों द्वारा चरखे पर सूत कातने की प्रस्तुति भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों के इस जीवंत रूप ने भारतीय संस्कृति, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना का संदेश दिया। प्रस्तुति को देखने के लिए दर्शकों की विशेष रुचि दिखाई दी।
प्रदर्शनी को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। श्रीमती नीतू सिंगल, श्रीमती सोनिका गोयल, श्रीमती रीता जयरथ, श्रीमती मेघा भटनागर और श्रीमती शिखा कालरा ने तैयारियों, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, प्रस्तुतियों को व्यवस्थित करने और आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बच्चों की लेखन प्रतिभा को विशेष पहचान और सम्मान देते हुए चयनित विद्यार्थियों को ‘हस्तलेखन सम्राज्ञी’ और ‘हस्तलेखन सम्राट’ के गौरवपूर्ण खिताब प्रदान किए गए। विजेता विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। विशेष प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में अभय प्रताप राणा, यूकेजी-द, काव्या, कक्षा पांच-स, ओम देशवाल, कक्षा आठ-अ, परी, कक्षा छह-अ, शुभि, कक्षा आठ-स, परी मलिक, कक्षा आठ-स, वेदांश कौशिक, कक्षा सात-स और सार्थक गोयल, कक्षा सात-ब शामिल रहे।
कार्यक्रम में समाजसेवी विभोर सिंघल ने प्रतिभागी विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए। इस अवसर पर भूपेंद्र शर्मा, मोहित मलिक, प्रभात मलिक और प्रशांत बालियान सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और विद्यालय की ओर से किए गए इस रचनात्मक प्रयास की सराहना की।
प्रदर्शनी में आने वाले प्रत्येक अभिभावक को उनके बच्चे की सुंदर लेखनी का एक रोल स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट किया गया। विद्यालय की इस पहल ने बच्चों की मेहनत को परिवारों के लिए एक यादगार अनुभव में बदल दिया।
विद्यालय की डायरेक्टर श्रीमती अलका जैन ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा विद्यार्थियों की सुंदर लिखावट को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को यह विश्वास दिलाना है कि निरंतर अभ्यास से वह अपनी लेखनी को बेहतर बना सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में बच्चों का कलम और कागज से जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है। सुंदर लेखन के प्रति रुचि विकसित करने से बच्चों में धैर्य, एकाग्रता, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास जैसे गुण भी विकसित होते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्रयास है कि प्रदर्शनी देखने वाला प्रत्येक बच्चा प्रेरित होकर अपनी लेखनी को पहले से बेहतर बनाने का संकल्प ले। जब एक बच्चा दूसरे की सुंदर लेखनी देखकर स्वयं बेहतर लिखने के लिए प्रेरित होता है, तभी ऐसी प्रदर्शनी की वास्तविक सफलता मानी जा सकती है।
श्रीमती अलका जैन ने कहा कि विद्यालय बच्चों की प्रतिभा को केवल कक्षा तक सीमित रखने के बजाय उसे अभिभावकों और समाज के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। बच्चों की प्रतिभा की सराहना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें आगे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है।
प्रदर्शनी ने विद्यालय की उस शैक्षिक सोच को भी सामने रखा, जिसमें पढ़ाई के साथ प्रतिभा, प्रतिभा के साथ संस्कार और संस्कारों के साथ रचनात्मकता को समान महत्व दिया जाता है। बच्चों की कलम से निकले अक्षरों ने न केवल सुंदर लेखन का परिचय दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सही दिशा में किया गया अभ्यास प्रतिभा को निखारने के साथ व्यक्तित्व को भी मजबूत बनाता है।

