मुंबई। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी सामने आई है। कंपनी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 8,110 करोड़ रुपये की एंकर बुक के मुकाबले 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मांग मिली। यानी एंकर निवेशकों के लिए निर्धारित शेयरों की तुलना में मांग 30 गुना से भी ज्यादा रही। कंपनी के दावे के मुताबिक, भारतीय आईपीओ इतिहास में किसी इश्यू के लिए संस्थागत निवेशकों की मांग पहली बार 2.5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से आगे पहुंची है।
इस आईपीओ में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश संस्थानों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। देश की प्रमुख बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), बड़े म्यूचुअल फंड और वैश्विक निवेश प्रबंधन कंपनियों ने एंकर बुक में हिस्सा लिया। निवेशकों की इस भागीदारी को जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार और भविष्य की संभावनाओं में संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी के रूप में देखा जा रहा है।
एलआईसी को मिला सबसे बड़ा आवंटन
एंकर निवेशकों के आवंटन में एलआईसी सबसे आगे रही। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, एलआईसी को 500 करोड़ रुपये का आवंटन मिला। इसके अलावा ब्लैकरॉक, कैपिटल इंटरनेशनल, फिडेलिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च, सिंगापुर के सरकारी निवेश संस्थान जीआईसी, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और एसबीआई म्यूचुअल फंड को लगभग 425-425 करोड़ रुपये के शेयर आवंटित किए गए।
कुल 8,110 करोड़ रुपये की एंकर बुक में निवेशकों की भागीदारी इस आईपीओ के प्रति संस्थागत मांग का संकेत देती है। हालांकि, एंकर निवेशकों का आवंटन अपने आप में आईपीओ की लिस्टिंग या भविष्य में शेयर के प्रदर्शन की गारंटी नहीं है।
देश के बड़े म्यूचुअल फंड भी शामिल
जियो प्लेटफॉर्म्स की एंकर बुक में देश के कई प्रमुख म्यूचुअल फंड शामिल हुए। इनमें एसबीआई म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, कोटक म्यूचुअल फंड और निप्पॉन म्यूचुअल फंड के नाम शामिल हैं।
इन घरेलू संस्थानों के साथ वैश्विक निवेश प्रबंधन कंपनियों ने भी भागीदारी की। ब्लैकरॉक, कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी, श्रोडर्स, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट और एलियांज जैसे बड़े नाम एंकर निवेशकों की सूची में शामिल रहे।
घरेलू और विदेशी निवेशकों की यह भागीदारी आईपीओ में निवेशकों के व्यापक आधार को दर्शाती है। हालांकि, प्रत्येक निवेशक की भागीदारी और निवेश संबंधी निर्णय अलग-अलग रणनीतियों तथा जोखिम आकलन पर आधारित हो सकते हैं।
सॉवरेन और पेंशन फंडों ने भी दिखाई दिलचस्पी
एंकर बुक में लंबी अवधि के निवेशकों की भी भागीदारी रही। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सिंगापुर के जीआईसी, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (एडीआईए), कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (क्यूआईए) और नॉर्गेस जैसे सॉवरेन निवेश संस्थानों ने हिस्सा लिया।
इसके अलावा कैलिफोर्निया स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट सिस्टम, फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम, एसबीआई पेंशन, एचडीएफसी पेंशन, आईसीआईसीआई पेंशन और यूटीआई पेंशन जैसे पेंशन फंड भी एंकर निवेशकों में शामिल रहे।
पेंशन और सॉवरेन फंड आम तौर पर दीर्घकालिक निवेश रणनीतियों के तहत विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी लगाते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में उनकी भागीदारी भी इस इश्यू के प्रति संस्थागत रुचि को रेखांकित करती है।
200 से ज्यादा निवेशक संस्थाओं और फंड योजनाओं की भागीदारी
जियो प्लेटफॉर्म्स की एंकर बुक में 200 से अधिक निवेशक संस्थाओं और फंड योजनाओं ने हिस्सा लिया। इनमें वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश करने वाले ड्रैगोनियर, जैनस हेंडरसन और नाइंटी वन जैसे निवेशक भी शामिल बताए गए हैं।
इसके साथ ही एनाम, प्रेमजी और एचसीएल से जुड़े भारतीय फैमिली ऑफिस ने भी एंकर बुक में भागीदारी की। इस तरह आईपीओ में घरेलू म्यूचुअल फंड, वैश्विक निवेश प्रबंधक, पेंशन फंड, सॉवरेन फंड और फैमिली ऑफिस जैसे अलग-अलग श्रेणियों के निवेशक शामिल हुए।
आईपीओ को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की एंकर बुक में आई मांग ने इसे लेकर बाजार की दिलचस्पी को चर्चा में ला दिया है। 8,110 करोड़ रुपये के एंकर आवंटन के मुकाबले 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बताई गई मांग इस इश्यू के पैमाने को दर्शाती है।
अब निवेशकों की नजर आईपीओ से जुड़ी आगे की प्रक्रिया, शेयर आवंटन और बाजार में संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। निवेशकों के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि एंकर बुक में बड़ी मांग होने के बावजूद शेयर का भविष्य का प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों, कंपनी के वित्तीय नतीजों और अन्य कारकों पर निर्भर करेगा।

