देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में मानसूनी बादलों ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गुरुवार को राज्यभर में मानसून की रफ्तार इतनी तेज रही कि देखते ही देखते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विज्ञान विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नौ और 10 जुलाई के लिए राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। आसमान में उमड़ते-घुमड़ते बादलों और गरजती बिजली के बीच राज्य सरकार ने पूरी प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर रहने के कड़े निर्देश दिए हैं। एहतियात के तौर पर कई संवेदनशील जिलों में कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के स्कूलों में ताले लटक गए हैं।
आसमान में घने बादलों का डेरा, सुबह से थमा नहीं बारिश का सिलसिला
राज्य में बुधवार देर रात से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का दौर गुरुवार सुबह तक बिना रुके जारी रहा। राजधानी देहरादून समेत सूबे के अधिकांश मैदानी और पहाड़ी इलाकों में आसमान काले, घने बादलों से ढका रहा। कई क्षेत्रों में रुक-रुक कर हुई अत्यधिक तेज बारिश ने जहां एक तरफ उमस भरी गर्मी से राहत देकर मौसम को सुहावना बनाया, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों पर भूस्खलन और मैदानों में जलभराव का खतरा बढ़ा दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर और चम्पावत जिलों में प्रकृति का सबसे उग्र रूप देखने को मिल सकता है, जिसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले पर्वतीय जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। राहत की उम्मीद अगले दिन भी नहीं है, क्योंकि 10 जुलाई को पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और बागेश्वर में ऑरेंज तथा देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में येलो अलर्ट का साया बना रहेगा।
हरिद्वार और पौड़ी में अचानक तीन घंटे का रेड अलर्ट, धड़कनें बढ़ीं
गुरुवार की सुबह मौसम विभाग ने हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल के कुछ संवेदनशील इलाकों के लिए अचानक अगले तीन घंटों का रेड अलर्ट जारी कर सबको चौंका दिया। इस चेतावनी के तहत हरिद्वार जिले के लक्सर, मंगलौर और खानपुर के साथ-साथ पौड़ी जिले के गुमखाल, दुगड्डा, कोटद्वार और देवराना जैसे क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई। अचानक बदले इस रुख ने आपदा प्रबंधन तंत्र की धड़कनें बढ़ा दीं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने तत्परता दिखाते हुए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी आँखों और कान खुले रखें। संवेदनशील और भूस्खलन की कगार पर खड़े क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के साथ-साथ राहत एवं बचाव दलों को चौबीसों घंटे पूरी तरह तैयार रखने को कहा गया है। मुख्य मार्गों और संपर्क मार्गों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके।
भूस्खलन से ढहा पुराना भवन, प्रशासन की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा
इस बीच, भारी बारिश के चलते पहाड़ों से पत्थरों के गिरने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग-707ए पर स्थित कद्दूखाल में अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आने से एक पुराना खाली पड़ा भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गया। गनीमत यह रही कि जिला प्रशासन ने खतरे की आशंका को पहले ही भांप लिया था और समय रहते वहां चल रहे दो रेस्तरां, कुछ व्यावसायिक खोखों और निर्माण श्रमिकों की झुग्गियों को पूरी तरह खाली करा दिया था। इस वजह से एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया। फिलहाल राजस्व विभाग की टीमें मौके पर डटी हुई हैं।
बांधों से पानी छोड़े जाने की चेतावनी, उफान पर नदियां और नाले
मौसम की इस मार के बीच जलविद्युत परियोजनाओं से पानी छोड़े जाने के कारण नदियों के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एसजेवीएन के नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना प्रबंधन ने सूचना दी है कि बैराज और डी-सिल्टिंग टैंक की सफाई यानी फ्लशिंग के कारण गुरुवार सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे तक चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ा जाएगा। इसके कारण निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।
इसी तरह की स्थिति उत्तरकाशी जिले में भी बनी हुई है। यहां स्थित एसजेवीएन की नेटवाड़ मोरी हाइड्रो पावर स्टेशन परियोजना से भी गुरुवार को बैराज और डीसिल्टिंग टैंक में हेड लॉस होने की वजह से पांच घंटे तक चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ने का काम किया जा रहा है। परियोजना प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने नदी के किनारों पर रहने वाले ग्रामीणों, पशुपालकों और पर्यटकों को सख्त हिदायत दी है कि वे नदियों, नालों और बरसाती जलधाराओं के पास बिल्कुल न जाएं।
अनावश्यक यात्रा से बचें और अफवाहों पर ध्यान न दें: आपदा प्रबंधन सचिव
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों और तीर्थयात्रियों से बेहद भावुक और गंभीर अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को हल्के में न लें। जब तक बहुत जरूरी न हो, पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने से बचें। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और उफनते नदी-नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और केवल सरकारी व आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की बात कही है।
दूसरी ओर, बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए हरिद्वार, देहरादून, अल्मोड़ा, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ जिलों के जिलाधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से कक्षा एक से 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आपदा की इस घड़ी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



