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मुजफ्फरनगर में मेरठ लाठीचार्ज कांड पर भड़के राकेश टिकैत: बोले- गाड़ी में बिठाकर थप्पड़ मारना तानाशाही, नए अफसरों को आंदोलन संभालने का तजुर्बा ही नहीं

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मुजफ्फरनगर। मेरठ में आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज और थप्पड़बाजी के मामले ने अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत और किसान आंदोलनों के गलियारों में भारी तूल पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मुजफ्फरनगर में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए किसान नेता ने पुलिस और प्रशासन की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि खाकी की आड़ में आम जनता और सम्मानित नागरिकों पर हाथ उठाने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और थप्पड़ मारने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।

नसीहत देते हुए बोले- नए अधिकारियों को नहीं है आंदोलन संभालने का प्रशिक्षण

राकेश टिकैत ने आज के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलनकारियों से बातचीत करने और उनसे निपटने का एक तय और सभ्य तरीका कानून में दर्ज होता है। लेकिन वर्तमान समय में जो नए अधिकारी सेवा में आ रहे हैं, उन्हें आंदोलन और प्रदर्शनों की संवेदनशीलता को समझने तथा उससे निपटने का कोई बुनियादी प्रशिक्षण या तजुर्बा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अगर कोई अपनी बात रखने सड़क पर उतरा है, तो सबसे पहले उसे प्यार से समझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। अगर कोई कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी भी हो, तो वो कानून के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए, न कि सरेराह गुंडागर्दी के जरिए।

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जब पुलिस की गाड़ी में बैठ गया व्यक्ति, तो फिर किसके आदेश पर पड़ीं लाठियां

मेरठ की घटना का जिक्र करते हुए राकेश टिकैत ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि पुलिस सुरक्षा के बीच मौजूद एक सम्मानित व्यक्ति के साथ खुलेआम मारपीट करना और थप्पड़ जड़ना पूरी तरह से अमानवीय और गैरकानूनी है। उन्होंने कानून का हवाला देते हुए कहा कि जब पुलिस किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेकर अपनी सरकारी गाड़ी में बैठा लेती है, तो उस पल से उस व्यक्ति की जान और माल की सुरक्षा की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की हो जाती है। इसके बावजूद पुलिस कस्टडी में किसी व्यक्ति को थप्पड़ मारना घोर तानाशाही और सरकारी गुंडागर्दी है, जिसे भारतीय किसान यूनियन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने साफ कहा कि भाकियू हर पीड़ित के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और वह जल्द ही पीड़ित अधिवक्ता और उनके परिवार से मिलकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे।

एसएसपी के व्यवहार पर उठाए गंभीर सवाल, मुकदमा दर्ज करने की ठानी

जिले के कप्तान यानी एसएसपी को सीधे आड़े हाथों लेते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि किसी भी जिम्मेदार और शीर्ष अधिकारी का मुख्य काम जनता और आंदोलनकारियों के बीच सेतु बनकर संवाद स्थापित करना और शांति व्यवस्था कायम रखना होता है, न कि खुद कानून हाथ में लेकर मारपीट पर उतारू हो जाना। उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों ने कानून को अपनी जेब में रखकर थप्पड़बाजी की है, उन पर संबंधित धाराओं के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस ने उस व्यक्ति को हिरासत में ले ही लिया था, तो उसे नियमानुसार अदालत में पेश कर जेल भेजा जाना चाहिए था, कानून के रक्षकों को उसे बीच सड़क पर पीटने का अधिकार किसने दिया।

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अन्याय के खिलाफ नहीं थमेगी आवाज, अत्याचार होंगे तो देश में आंदोलन भी होंगे

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दो टूक लहजे में साफ कर दिया कि सरकार और प्रशासन यह न समझे कि वे लाठी के दम पर जनता की आवाज को दबा देंगे। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा किसानों, मजदूरों, वकीलों या समाज के किसी भी आम नागरिक के साथ इस तरह का अन्याय और क्रूरता की जाएगी, तो उसके खिलाफ आंदोलन और तेज होंगे। लोकतंत्र ने देश के हर नागरिक को अपनी जायज मांग और बात रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार दिया है और शासन में बैठे लोगों को इस अधिकार का सम्मान करना ही होगा। टिकैत ने अंत में प्रशासन को नसीहत देते हुए कहा कि जनता के बीच अपना विश्वास बनाए रखने के लिए अधिकारियों को संयम, मर्यादा और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए, वरना किसान यूनियन इस तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर बड़ा मोर्चा खोलने से पीछे नहीं हटेगी।

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