पुरी। विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर शनिवार को पूरी नगरी भक्ति और आस्था के रंग में रंग गई। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे। गुंडिचा मंदिर के सामने भव्य रथों पर विराजमान तीनों देवी-देवताओं के दर्शन कर भक्तों ने आशीर्वाद मांगा।
रथ यात्रा के दौरान पुरी की सड़कों पर श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भगवान की भक्ति में लीन नजर आए। दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे भक्तों ने धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया और भगवान जगन्नाथ के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुरी पुलिस और प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रमुख स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई।
प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
एक श्रद्धालु ने कहा कि वह भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करते हैं कि दुनिया में शांति बनी रहे और सभी लोगों को सद्बुद्धि मिले। उन्होंने प्रशासन की व्यवस्थाओं को भी बेहतर बताया।
विदेशी भक्तों ने भी महसूस की आध्यात्मिक अनुभूति
रथ यात्रा में शामिल होने के लिए विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। हंगरी की राधिका लीला देवी ने रथ यात्रा के अनुभव को बेहद भावुक और आध्यात्मिक बताया।
उन्होंने कहा कि यहां भक्तों की आस्था देखकर मन भावुक हो जाता है। किसी की आंखों में खुशी के आंसू हैं तो कोई भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा में डूबा हुआ है। उन्होंने कहा कि पुरी में भगवान जगन्नाथ के प्रति लोगों की भक्ति अद्भुत है।
सदियों पुरानी परंपरा का निभाया जा रहा निर्वहन
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भारत के सबसे बड़े और पवित्र धार्मिक आयोजनों में शामिल है। यह एकमात्र ऐसा अवसर माना जाता है जब भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।
परंपरा के अनुसार तीनों देवी-देवताओं को भव्य रूप से सजाए गए लकड़ी के रथों पर विराजमान किया जाता है और हजारों श्रद्धालु इन रथों को खींचते हैं। धार्मिक मंत्रों, भजनों और जयकारों के बीच निकलने वाली यह यात्रा श्रद्धा और आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक आयोजित की जाती है, जहां भगवान कुछ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर विश्राम करते हैं। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ के सभी लोगों तक पहुंचने और समान भाव से आशीर्वाद देने की भावना को दर्शाती है।
हर साल इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु, संत और पर्यटक शामिल होते हैं। इसी कारण जगन्नाथ रथ यात्रा भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक प्रमुख प्रतीक बन चुकी है।



