नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि पेपर लीक और परीक्षा विवादों की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मांग पर फैसला नहीं करती है तो आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
मीडिया से बातचीत में आशुतोष रांका ने कहा कि पहले यह देखना होगा कि किन 47 अधिकारियों को हटाया गया है और किन कारणों से यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि इन सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद ही इस फैसले का सही आकलन किया जा सकेगा।
रांका ने कहा कि उनकी पार्टी लगातार यह कहती रही है कि पेपर लीक और नीट परीक्षा विवाद के बाद सामने आए घटनाक्रमों की जवाबदेही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। उनके अनुसार, केवल अधिकारियों पर कार्रवाई करने से मूल सवालों का समाधान नहीं होगा।
‘सरकार नहीं मानी तो बनाएंगे आगे की रणनीति’
आशुतोष रांका ने कहा कि यदि पूरे देश में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठ रही है और सरकार पहले से ही यह स्पष्ट कर रही है कि इस्तीफा नहीं होगा, तो फिर बातचीत का उद्देश्य क्या रह जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार का यही रुख जारी रहता है तो आंदोलनकारी अपनी अगली रणनीति के अनुसार फैसला लेंगे।
उन्होंने बताया कि अब तक सरकार के साथ हुई बातचीत में मुआवजे और कानूनी मामलों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं और सिद्धांततः सहमति भी बनी है। उम्मीद है कि इन मुद्दों पर लिखित समझौता भी मिल जाएगा। हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग पर अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
रांका ने कहा कि यदि सरकार पहले ही यह तय कर चुकी है कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, तो फिर इस विषय पर लगातार बैठकें करने का औचित्य समझ से परे है।
इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की थी।
बैठक के बाद जेपी नड्डा ने कहा था कि सरकार ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों की बातें विस्तार से सुनी हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधियों ने तीन प्रमुख मांगें और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े पांच सुझाव सरकार के सामने रखे हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि शनिवार दोपहर फिर बैठक होगी, जिसमें आंतरिक चर्चा के बाद अपना पक्ष रखा जाएगा।


