
नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियानों के साथ देशवासियों का जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केवल आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश को तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और विनिर्माण के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनना होगा।
सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सेमीकंडक्टर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज की डिजिटल दुनिया में चिप का महत्व बेहद बढ़ गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर मेडिकल उपकरणों और परिवहन व्यवस्था तक लगभग हर आधुनिक क्षेत्र में सेमीकंडक्टर की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आज ऐसी स्थिति है कि चिप के बिना आधुनिक दुनिया के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। भारत ने इसी जरूरत को समझते हुए सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और इनमें तैयार होने वाले उत्पादों का निर्यात भी शुरू होने की जानकारी उन्हें मिली है।
उन्होंने कहा कि आने वाले सात से आठ वर्षों में देश में कई और सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महत्वपूर्ण खनिजों पर भी भारत की नजर
प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण खनिजों को भी आत्मनिर्भरता के लिए बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का बड़ा हिस्सा महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भर है और भारत इस क्षेत्र में अपनी जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
पीएम मोदी ने बताया कि महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया गया है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर की घोषणा भी की गई है।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कई देशों के साथ समझौते किए जा रहे हैं और दुनिया के कई देश इस क्षेत्र में भारत पर भरोसा करने लगे हैं।
चिप और एआई के साथ ऊर्जा सुरक्षा भी जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस गति से दुनिया तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, उसमें ऊर्जा की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा सेंटर जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा अब केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि समय की महत्वपूर्ण जरूरत बन चुकी है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही कई मजबूत कदम उठाए हैं।
परमाणु ऊर्जा से ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा के बड़े माध्यम के रूप में परमाणु ऊर्जा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसद में ‘शांति एक्ट’ पारित करके भारत ने इस दिशा में नए लक्ष्य की ओर बढ़ने का रास्ता तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बताया कि आने वाले एक दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
आत्मनिर्भरता से विकसित भारत तक का सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में आत्मनिर्भरता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सेमीकंडक्टर निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मजबूत क्षमता विकसित करना इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं।
उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल केवल नारे नहीं हैं, बल्कि देश की उत्पादन क्षमता और आत्मविश्वास को मजबूत करने के माध्यम हैं।
लालकिले से प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश को अपनी तकनीकी, औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ को बताया विकसित भारत का महामार्ग
80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता को भारत के भविष्य की विकास यात्रा से जोड़ते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत ही विकसित भारत तक पहुंचने का महामार्ग है।
सेमीकंडक्टर से लेकर महत्वपूर्ण खनिज और परमाणु ऊर्जा तक, सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


