बाराबंकी। नेपाल से लगातार छोड़े जा रहे पानी के चलते उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ और तेज कटान का संकट भी गहराता जा रहा है। रामनगर तहसील के हेतमापुर गांव में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं। नदी के किनारे बसे परिवारों के घर लगातार कटान की जद में आ रहे हैं और कई पक्के मकान देखते ही देखते सरयू नदी में समा चुके हैं।
बाढ़ और कटान की स्थिति का असर रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्रों के सैकड़ों गांवों पर पड़ रहा है। नदी का पानी लगातार गांवों की ओर बढ़ रहा है, जबकि किनारों पर कटान तेज होने से ग्रामीणों के सामने अपने घर और गृहस्थी बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
एक के बाद एक नदी में समा रहे पक्के मकान
हेतमापुर गांव में सरयू नदी का कटान ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। ग्रामीणों के मुताबिक अब तक 10 से 12 मकान नदी में गिर चुके हैं। पक्के मकानों के एक के बाद एक नदी में समाने से गांव में दहशत का माहौल है।
कटान इतनी तेजी से हो रहा है कि ग्रामीणों को अपने घरों के सुरक्षित रहने की उम्मीद भी कम होती जा रही है। नदी का पानी और कटान उनके मकानों के बेहद करीब पहुंच चुका है। ग्रामीणों को डर है कि किसी भी समय उनका घर भी नदी में समा सकता है।
हालात से परेशान कई परिवार अब प्रशासन से किसी चमत्कार की उम्मीद करने के बजाय खुद ही अपने घरों को तोड़कर जरूरी सामान निकाल रहे हैं। ग्रामीण पक्के मकानों को तोड़कर उनकी ईंटें, दरवाजे, खिड़कियां, टीन शेड और गृहस्थी का जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।
घर के साथ रोजी-रोटी भी संकट में
सरयू के कटान ने केवल ग्रामीणों के सिर से छत छीनने का खतरा पैदा नहीं किया है, बल्कि उनकी रोजी-रोटी भी संकट में डाल दी है। गांव के श्यामू बताते हैं कि वह मंदिर के पास छोटी सी मिठाई की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
श्यामू के परिवार में आठ लोग हैं। उनका कहना है कि अब उनके सामने घर और रोजगार दोनों को बचाने की चुनौती है। नदी लगातार कटान कर रही है और उनका मकान सुरक्षित नहीं रह गया है। उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि पता नहीं कब नदी का कटान उनके घर तक पहुंच जाए।
उनके लिए यह सिर्फ एक मकान खोने का डर नहीं है, बल्कि परिवार के भविष्य और रोजी-रोटी को लेकर भी बड़ा संकट है।
ग्रामीण बोले, समय रहते बचाव कार्य होता तो बच जाते घर
ग्रामीण राजू ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कटान को समय रहते रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि यदि बड़े पत्थर डालकर मजबूत बचाव कार्य कराया जाता तो शायद उनके समेत कई ग्रामीणों के मकान बचाए जा सकते थे।
राजू के मुताबिक अधिकारी समय-समय पर मौके पर आते रहे, लेकिन कटान रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम नहीं हो सके। अब जब नदी लगातार मकानों को अपनी चपेट में ले रही है तो ग्रामीणों के सामने अपने घरों को बचाने के लिए बहुत कम विकल्प बचे हैं।
राजू ने बताया कि फिलहाल प्रशासन की ओर से दो वक्त का खाना उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन भोजन की व्यवस्था से उनके घर और भविष्य की चिंता खत्म नहीं हो जाती। उनका कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों के घर नदी में समा रहे हैं, वे आगे कहां रहेंगे और अपनी जिंदगी फिर से कैसे शुरू करेंगे।
करोड़ों खर्च के बावजूद हर साल वही संकट
बाढ़ और कटान से परेशान ग्रामीणों में प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरयू नदी में हर साल बाढ़ आती है। कटान रोकने और बाढ़ से बचाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बाढ़ आते ही जमीनी हकीकत सामने आ जाती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि हर साल बाढ़ और कटान का खतरा रहता है तो स्थायी बचाव के इंतजाम क्यों नहीं किए जाते। उनका कहना है कि आखिर हर बार बाढ़ के दौरान उन्हें अपनी जिंदगी और गृहस्थी बचाने के लिए खुद ही क्यों जूझना पड़ता है।
सैकड़ों गांवों पर मंडरा रहा संकट
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर का असर केवल हेतमापुर गांव तक सीमित नहीं है। रामनगर, सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट तहसील क्षेत्र के सैकड़ों गांव बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीणों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता अपने परिवार और सामान को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की है। कई परिवार अपने घरों से जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं, जबकि जिन मकानों तक नदी का कटान पहुंच चुका है, उनके सामने घर छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा।
बाढ़ के साथ बढ़ रही बेबसी
सरयू नदी का बढ़ता जलस्तर बाराबंकी के ग्रामीण इलाकों में केवल पानी नहीं ला रहा, बल्कि लोगों के सामने बेबसी भी बढ़ा रहा है। एक तरफ नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और दूसरी तरफ कटान लगातार जमीन को निगलता जा रहा है।
जिन घरों को ग्रामीणों ने वर्षों की मेहनत और कमाई से बनाया था, उन्हें अपनी आंखों के सामने टूटते देखना उनके लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। कई परिवार अब अपने हाथों से घर तोड़कर उसकी ईंट और जरूरी सामान निकाल रहे हैं, ताकि कम से कम उनकी मेहनत की कुछ निशानी सुरक्षित रह सके।
प्रशासन के सामने राहत के साथ स्थायी समाधान की चुनौती
फिलहाल प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत और भोजन उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग स्थायी बचाव कार्य की है। ग्रामीण चाहते हैं कि नदी के कटान को रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि हर साल बाढ़ आने पर उन्हें अपना घर और जमीन बचाने के लिए उसी संकट से न गुजरना पड़े।
बाराबंकी में सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने के बीच अब प्रशासन के सामने तत्काल राहत पहुंचाने के साथ उन इलाकों में प्रभावी बचाव व्यवस्था करने की चुनौती है, जहां नदी का कटान आबादी के बेहद करीब पहुंच चुका है। हेतमापुर में नदी में समाते मकान इस बात की गंभीर चेतावनी हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।

