देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर पीपलकोटी क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। विष्णुगाड पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में मलबा और पानी भरने के कारण अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हादसे के बाद सुरंग के भीतर फंसे अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
सुरंग में भूधंसाव के बाद मचा हड़कंप
जिला प्रशासन के अनुसार गुरुवार शाम सुरंग में भूधंसाव की घटना हुई। इसके बाद करीब 1.50 किलोमीटर हिस्से में मलबा और पानी भर गया। निर्माणाधीन टनल की कुल लंबाई करीब तीन किलोमीटर बताई गई है।
हादसे के तत्काल बाद सुरंग में 22 लोगों के फंसे होने की सूचना सामने आई थी। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और राहत बचाव एजेंसियां सक्रिय हो गईं। सुरंग के भीतर मलबा और पानी अधिक होने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
रातभर घटनास्थल पर डटे रहे जिलाधिकारी
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार रातभर घटनास्थल पर मौजूद रहे और राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी करते रहे। प्रशासन की ओर से सुरंग में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी सहायता का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन के अनुसार राहत अभियान में सहयोग के लिए टनल के भीतर गए छह बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं। बचाव दल बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरंग के भीतर पहुंचकर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
सात श्रमिकों की मौत से पसरा मातम
हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में प्रदीप सिंह पवार, मुकेश, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर के नाम शामिल हैं।
प्रदीप सिंह पवार की उम्र 31 वर्ष बताई गई है और वह टिहरी जिले के चंबा क्षेत्र के ग्राम गेंवाल के निवासी थे। मुकेश चमोली जिले के उर्गम के रहने वाले बताए गए हैं। दुर्लभ शर्मा बिहार के निवासी थे, जबकि विजय और जितेंद्र कुमार झारखंड से बताए गए हैं। लोकेश्वर और भुनेश्वर के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।
मृतकों की पहचान और अन्य विवरण जुटाने की प्रक्रिया प्रशासन की ओर से जारी है।
घायलों का गोपेश्वर जिला चिकित्सालय में उपचार
हादसे के बाद घायल कर्मचारियों को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार अस्पताल में सुनील दीवान, हाबिल गुड़िया, निस्तार भिगरा, विनोद रावना, दीना बैगरा, खेला राम बिसरा, छबेर सिंह, तिलक राज, चंदन कुमार, अवधेश, नन्दलाल, रोहित पांडे और पेन सिंह समेत अन्य कर्मचारियों का उपचार कराया जा रहा है।
सुनील दीवान छत्तीसगढ़ के निवासी बताए गए हैं। हाबिल गुड़िया, निस्तार भिगरा, विनोद रावना, दीना बैगरा और खेला राम बिसरा झारखंड के रहने वाले हैं। छबेर सिंह पंजाब और तिलक राज हिमाचल प्रदेश के निवासी बताए गए हैं।
चंदन कुमार, अवधेश, नन्दलाल और रोहित पांडे बिहार के निवासी बताए गए हैं, जबकि पेन सिंह छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। रोहित पांडे को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर रेफर किया गया है। सूची में गोविन्द को डिस्चार्ज बताया गया है। उनके अन्य विवरण की जानकारी जुटाई जा रही है।
एनडीआरएफ से लेकर आईटीबीपी तक जुटीं
सुरंग हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस तथा अन्य तकनीकी और विशेषज्ञ टीमें जुटी हुई हैं। बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर जमा मलबा और पानी है।
सुरंग के प्रभावित हिस्से में लगातार काम करते हुए बचाव दल फंसे लोगों तक पहुंचने का रास्ता बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को बेहद खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे। प्रतिकूल मौसम के कारण हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई।
मुख्यमंत्री यहां पहुंचकर टीएचडीसी की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। वह अधिकारियों और बचाव एजेंसियों से अभियान की प्रगति की जानकारी भी लेंगे।
‘हर श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सुरंग में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने बचाव अभियान में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराने तथा अभियान को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मलबे और पानी के बीच जिंदगी की तलाश जारी
चमोली सुरंग हादसे के बाद अब राहत और बचाव दलों की पूरी कोशिश सुरंग के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सुरंग में जमा मलबे तथा पानी के बावजूद अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रशासन ने कहा है कि बचाव अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और उपलब्ध सभी संसाधनों तथा तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है। घटनास्थल पर अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है।



