नई दिल्ली। फास्ट-मूविंग कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (FMCD) क्षेत्र में भारत के टियर-2 शहर नए रोजगार के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। सीआईईएल एचआर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, टियर-2 शहरों में कुल एफएमसीडी नौकरियों का 22 प्रतिशत हिस्सा है। यह बदलाव महानगरों से आगे बढ़कर गैर-महानगरीय बाजारों में बढ़ती उपभोक्ता मांग को दर्शाता है।
मई 2023 से मई 2025 तक इस क्षेत्र में भर्तियों में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो निरंतर विकास को दर्शाती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कूलिंग अप्लायंसेज, इनवर्टर और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों की बढ़ती रुचि इस वृद्धि का मुख्य कारण है।
टियर-2 शहरों जैसे इंदौर, जयपुर, कोयंबटूर और लखनऊ में उपभोक्ता बाजारों का उदय रोजगार के भौगोलिक विविधीकरण को संकेत देता है।
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लैंगिक असमानता: महिलाओं की भागीदारी में कमी
एफएमसीडी क्षेत्र के मजबूत विकास के बावजूद, महिलाओं की भागीदारी में कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं इस क्षेत्र के कार्यबल का केवल 9 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं, जो प्रमुख उद्योगों में सबसे कम है। विनिर्माण, बिक्री और तकनीकी भूमिकाओं में लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक बाधाएं इसके लिए जिम्मेदार हैं।
सीआईईएल एचआर सर्विसेज के प्रबंध निदेशक और सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि विविधता अब एक प्रतिस्पर्धी लाभ है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं की कम भागीदारी का समाधान करने वाली कंपनियां व्यापक प्रतिभा पूल और नवाचार से लाभान्वित होंगी, खासकर जब महिलाएं उपभोक्ता खरीद निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
मिश्रा ने सुझाव दिया कि समावेश को कार्यस्थल से बोर्डरूम तक हर स्तर पर अपनाना चाहिए।
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नई भूमिकाओं का उदय और नवाचार
एफएमसीडी कंपनियां अब पारंपरिक विनिर्माण से आगे बढ़कर उपभोक्ता अनुभवों पर फोकस कर रही हैं। रिपोर्ट में औद्योगिक डिजाइनरों, डेटा इंजीनियरों, उत्पाद प्रबंधकों और ग्राहक सफलता विशेषज्ञों जैसी नई भूमिकाओं की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला गया है।
ये भूमिकाएं वास्तविक समय की जानकारी का उपयोग, उपयोगकर्ता-केंद्रित उत्पाद विकास और स्मार्ट, टिकाऊ उपकरणों के निर्माण में मदद कर रही हैं। डिजिटल परिवर्तन और IoT-आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग ने इन भूमिकाओं को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट में 1,00,000 अधिकारियों और 1,005 नौकरी पोस्टिंग्स के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण शामिल है, जो अग्रणी एफएमसीडी कंपनियों के करियर पृष्ठों से प्राप्त है।
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टियर-2 शहरों में रोजगार के अवसर
टियर-2 शहरों में एफएमसीडी क्षेत्र की वृद्धि ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। कम लागत, स्थानीय प्रतिभा और बेहतर बुनियादी ढांचे ने कंपनियों को आकर्षित किया है। 2024 में इन शहरों में भर्ती में 15-18 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
बिक्री, आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल मार्केटिंग भूमिकाओं में मांग बढ़ी है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल ने विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा दिया है। उदाहरण के लिए, स्मार्ट होम डिवाइसेज की मांग ने डेटा एनालिटिक्स विशेषज्ञों की आवश्यकता बढ़ाई है।
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चुनौतियां और भविष्य की दिशा
एफएमसीडी क्षेत्र में टियर-2 शहरों की भूमिका भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण है, लेकिन लैंगिक असमानता और कुशल श्रमिकों की कमी चुनौतियां हैं। कंपनियों को प्रशिक्षण और समावेशी नीतियों में निवेश करना चाहिए। सेमिकॉन इंडिया 2025 जैसे आयोजनों से तकनीकी नवाचार को बल मिलेगा। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र लाखों नौकरियां सृजित कर सकता है, जो टियर-2 शहरों को विकास के नए केंद्र बनाएगा।
