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‘नवाब विर्क’ बनकर तुर्की में छिपा था भारतीय भगोड़ा, अमित शाह बोले-‘मोदी सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस नीति का नतीजा’

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि भारत सरकार ने कथित नार्को-ट्रैफिकिंग सरगना नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने इसे मोदी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि नवप्रीत सिंह के खिलाफ ड्रग्स की तस्करी और अन्य आपराधिक मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि नवप्रीत सिंह ने कथित तौर पर ‘नवाब विर्क’ की फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर तुर्किए की नागरिकता हासिल की थी। गृह मंत्री के अनुसार, इसके बावजूद वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता रहा। भारतीय एजेंसियों ने उसकी पहचान और गतिविधियों का पता लगाया तथा संबंधित प्रक्रिया के बाद उसे तुर्किए से भारत वापस लाया गया।

गृह मंत्री ने कहा कि नवप्रीत सिंह को भारत लाकर ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में जेल भेजा गया है। उन्होंने इस कार्रवाई के लिए संबंधित जांच और सुरक्षा एजेंसियों को बधाई दी। अमित शाह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार दिसंबर 2029 से पहले देश में सक्रिय हर ड्रग कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है।

विदेशों में छिपे ड्रग तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों के खिलाफ भारत की एजेंसियों की कार्रवाई के बीच नवप्रीत सिंह का मामला सामने आया है। इससे पहले अप्रैल में ड्रग तस्करी के आरोपी मोहम्मद सलीम डोला को भी तुर्किए से भारत वापस लाया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री ने उस समय कहा था कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को डोला को तुर्किए से वापस लाने में सफलता मिली है। सरकार ने इसे ड्रग्स से जुड़े मामलों में वांछित आरोपियों और संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े लोगों को कानून के दायरे में लाने की दिशा में कार्रवाई बताया था।

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इसी तरह मई में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो के साथ समन्वय कर अजरबैजान से भगोड़े प्रभदीप सिंह को भारत वापस लाया था। प्रभदीप सिंह का मामला 358 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े एक बड़े ड्रग्स केस से संबंधित बताया गया था। पुलिस के अनुसार, वह 2023 से फरार था और प्रत्यर्पण संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद स्पेशल सेल की तीन सदस्यीय टीम उसे बाकू से भारत लेकर आई थी।

भारत और तुर्किए के बीच प्रत्यर्पण संबंधी समझौते पर वर्ष 2001 में हस्ताक्षर हुए थे, जबकि यह जून 2002 में लागू हुआ। इस समझौते के तहत दोनों देश आतंकवाद और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित आरोपियों के हस्तांतरण के लिए कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं।

विदेशों में मौजूद गंभीर आपराधिक मामलों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस सहित अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्थापित प्रक्रियाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय एजेंसियां ऐसे मामलों में संबंधित देशों के साथ समन्वय कर आरोपियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं।

नवप्रीत सिंह को भारत वापस लाए जाने की कार्रवाई को भी इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एजेंसियों के समन्वय से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

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