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मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का किया जिक्र, बोले- ‘यही है हिंदू स्वभाव’

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नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने वार्षिक विजयादशमी कार्यक्रम के संबोधन में कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थिति में कैप्टन स्मित ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी, वह किसी विशेष प्रशिक्षण का परिणाम मात्र नहीं, बल्कि उनके भीतर मौजूद संस्कारों और परंपराओं की अभिव्यक्ति थी। भागवत ने इसे हिंदू स्वभाव का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह स्वभाव विविधता की गरिमा और सुरक्षा को बढ़ावा देता है तथा राष्ट्रीय एकता और वैश्विक सद्भाव के लिए रचनात्मक शक्ति बन सकता है।

नागपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि परीक्षा की घड़ी में व्यक्ति के भीतर मौजूद मूल्य और संस्कार सामने आते हैं। उन्होंने कैप्टन स्मित मच्छार का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थिति में क्या करना है, इसकी अलग से कोई ट्रेनिंग नहीं थी, बल्कि उनके भीतर की परंपरा और संस्कार ही उस समय सामने आए।

भागवत ने कहा, “इसी भाव से प्रेरित होकर कैप्टन स्मित मच्छार ने हाल ही में जो किया, वह स्वाभाविक था। ऐसी स्थिति में क्या करना है, इसकी कोई ट्रेनिंग नहीं थी, उनके अंदर की परंपरा और संस्कार ही परीक्षा की उस घड़ी में सामने आ गए।”

‘विविधता की गरिमा और सुरक्षा का पोषण करता है हिंदू स्वभाव’

मोहन भागवत ने कैप्टन स्मित के कदम को हिंदू स्वभाव से जोड़ते हुए कहा कि यह स्वभाव विविधता की गरिमा और सुरक्षा का पोषण तथा संरक्षण करता है। उनके मुताबिक, ऐसे मूल्य राष्ट्रीय एकता और दुनिया में आपसी सद्भाव बढ़ाने में रचनात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

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संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि आरएसएस इन मूल्यों को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि व्यावहारिक कार्यों के माध्यम से उन्हें स्थापित करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि लोग संघ में सिर्फ भाषण सुनने के लिए नहीं आते, बल्कि कार्यों के जरिए इन मूल्यों का अभ्यास करते हैं।

विमान में सह-पायलट ने किया था चाकू से हमला

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी का यह मामला विमान में हुई एक गंभीर घटना से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह दुबई से तेल अवीव जा रहे बोइंग 737 विमान का संचालन कर रहे थे। उड़ान के दौरान उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर उन पर चाकू से हमला कर दिया।

हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इससे विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों को हमलावर पर काबू पाने तथा स्थिति को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिली।

घटना के दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर आने लगा था। ऐसे में यात्रियों और क्रू सदस्यों ने बीच-बचाव किया और हालात को संभालने में सहयोग दिया। इसके बाद विमान की सऊदी अरब के तबुक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। विमान में सवार सभी 174 यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी दी गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की थी तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना करते हुए उन्हें ‘हीरो’ बताया था। उन्होंने पायलट के साहस और दृढ़ संकल्प की तारीफ की थी और कहा था कि उनके कदम ने कई लोगों की जान बचाने तथा बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की।

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कैप्टन स्मित मच्छार को विमानन क्षेत्र में 13 साल से अधिक का अनुभव बताया गया है। फ्लाईदुबई से जुड़ने से पहले वह स्पाइसजेट में काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने लाइन ट्रेनिंग कैप्टन के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने मुख्य रूप से बोइंग 737 विमान पर लगभग 9,750 घंटे की उड़ान का अनुभव हासिल किया है।

संस्कार और व्यवहार पर संघ प्रमुख का जोर

विजयादशमी कार्यक्रम में कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के संस्कार और मूल्य उसके व्यवहार में दिखाई देते हैं। उन्होंने इसे विविधता के सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव से जोड़ते हुए कहा कि इन मूल्यों को व्यवहार में उतारना जरूरी है।

उनके संबोधन में कैप्टन स्मित की घटना साहस, जिम्मेदारी और संकट के समय निर्णय लेने की क्षमता के उदाहरण के रूप में सामने आई। भागवत ने कहा कि संघ इन मूल्यों को दैनिक कार्यों और व्यवहार के माध्यम से समाज में स्थापित करना चाहता है।