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मुजफ्फरनगर में प्रदूषण बोर्ड का बड़ा एक्शन: तलड़ा की हिमालया ग्रीन रिसाइक्लिंग फैक्ट्री सील, बंद मिला ETP और बॉयलर पर भी लगी मुहर

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मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई ने औद्योगिक इकाइयों में खलबली मचा दी है। पानीपत-खटीमा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम तलड़ा स्थित मैसर्स हिमालया ग्रीन रिसाइक्लिंग में जीरो डिस्चार्ज के दावे के बीच ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) संचालित नहीं मिला। जांच में वेस्ट और दूषित पानी के निस्तारण में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया। कार्रवाई के दौरान बॉयलर भी सील कर दिया गया।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारी गीतेश चंद्रा के नेतृत्व में एई कुंवर संतोष कुमार और जेई राजा गुप्ता की टीम ने फैक्ट्री में छापेमारी कर जांच की। जांच के दौरान ईटीपी बंद मिला। अधिकारियों के मुताबिक, फैक्ट्री में निकलने वाले वेस्ट और दूषित पानी का निर्धारित तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा था। जीरो परसेंट डिस्चार्ज के दावे के बावजूद दूषित पानी को ऐसे ही बहाए जाने का मामला सामने आया।

औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईटीपी का संचालन और दूषित पानी का उचित निस्तारण अनिवार्य है। ऐसे में ईटीपी का बंद मिलना और दूषित पानी के निस्तारण में लापरवाही सामने आना गंभीर मामला है। जांच के बाद टीम ने फैक्ट्री की गतिविधियां बंद कराते हुए बॉयलर को सील कर दिया। बोर्ड की इस कार्रवाई से क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों में हड़कंप मच गया।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। सीएक्यूएम के आदेश पर मुज़फ़्फ़रनगर समेत एनसीआर में 5 से 20 नवंबर तक गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध सहित कई कदम उठाए जा रहे हैं।

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फैक्ट्री में ईटीपी संचालन और दूषित पानी के निस्तारण को लेकर सामने आई स्थिति पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई अब औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े करती है।

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