नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भारत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत विभाजन की भयावह त्रासदी ने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया था।
रक्षामंत्री ने कहा कि विभाजन केवल इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की भी स्मृति है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना घर, परिवार, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में जीवन को दोबारा संवारने और आगे बढ़ने का संकल्प दिखाया।
बंटवारे का दर्द, अपनों को खोने का गहरा जख्म
राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी के दौरान विस्थापित हुए लोगों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लाखों लोगों को अपने घर और जन्मभूमि से दूर जाकर नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा।
इस दौरान अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। घर और संपत्ति छूट गई और जीवन पूरी तरह बदल गया। इसके बावजूद लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए अपने जीवन को फिर से खड़ा किया।
रक्षामंत्री ने कहा कि विस्थापित परिवारों ने आगे चलकर देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और धैर्य भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
‘सिर्फ इतिहास याद करने का दिन नहीं’
रक्षामंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि इतिहास की पीड़ाओं को केवल स्मृति में संजोकर रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनसे सबक लेना भी जरूरी है।
उन्होंने देशवासियों से ऐसा मजबूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाने का आह्वान किया, जहां विभाजन जैसी भयावह त्रासदी का दंश भविष्य में किसी समाज को दोबारा न झेलना पड़े।
शहीदों और विस्थापित परिवारों को श्रद्धांजलि
राजनाथ सिंह ने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले ज्ञात और अज्ञात लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन परिवारों के संघर्ष को भी नमन किया, जिन्हें अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होना पड़ा।
रक्षामंत्री ने कहा, “देश के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों तथा अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना कितना जरूरी है।
एकता और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश
रक्षामंत्री ने देशवासियों से इतिहास के इस दुखद अध्याय को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। साथ ही, अपनी जन्मभूमि से विस्थापित होकर नए सिरे से जीवन शुरू करने वाले परिवारों का संघर्ष भी भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।
दर्दनाक इतिहास से मजबूत भविष्य की सीख
राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत के विभाजन की उस त्रासदी का स्मरण कराता है, जिसने लाखों परिवारों को दुख, विस्थापन और अनिश्चितता के बीच धकेल दिया था।
उन्होंने कहा कि यह दिवस उन लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने अपना घर, परिवार, संपत्ति और स्वजन खोने के बावजूद जीवन को फिर से संवारने का संकल्प दिखाया।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जहां विविधताओं के बावजूद समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और एकता मजबूत रहे। विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शांतिपूर्ण, समरस और संवेदनशील समाज का निर्माण करना ही उन लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने उस दौर की भयावह परिस्थितियों का सामना किया।



