नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर संस्कृत का एक सुभाषित साझा किया। महाभारत के शांतिपर्व से लिए गए इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने चुनौतियों का सामना करने, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने तथा जीवन में सफलता हासिल करने का संदेश दिया।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया संस्कृत श्लोक है—
“न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥”
इसका भावार्थ है कि जो व्यक्ति जोखिम या संकट का सामना किए बिना आगे बढ़ना चाहता है, उसके लिए श्रेष्ठ परिणाम हासिल करना कठिन होता है। वहीं, जो व्यक्ति साहस और धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना करता है और उनसे उबरने में सफल रहता है, वही जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया है श्लोक
यह संस्कृत सुभाषित महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से संबंधित है। इसके जरिए जीवन में जोखिम और अनिश्चितता का सामना करने के महत्व को रेखांकित किया गया है। संदेश यह है कि बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए कई बार कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है और चुनौतियों के बीच भी आगे बढ़ने का साहस बनाए रखना जरूरी होता है।
साहस के साथ सावधानी भी जरूरी
इस श्लोक का आशय केवल जोखिम उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना समझदारी और सावधानी के साथ करना चाहिए। जीवन में सफलता पाने के लिए अनिश्चितताओं से पूरी तरह बचना संभव नहीं होता, लेकिन विवेकपूर्ण निर्णय और धैर्य के साथ चुनौतियों को पार करने से लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किए गए इस सुभाषित का संदेश है कि कठिनाइयों से घबराकर पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। साहस, आत्मविश्वास, धैर्य और विवेक के साथ निरंतर प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकता है।

