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राज्यसभा में ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी पर घमासान: जेपी नड्डा बोले-हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान, सुष्मिता देव का पक्ष भी सुना जाए

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नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को कथित ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। सीपीआई एम सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सदन में एक महिला सांसद ने उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया। मामले को लेकर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई।

मामले पर सदन के नेता और भाजपा सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि देश के हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी टिप्पणियों का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, नड्डा ने साथ ही कहा कि मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष के साथ दूसरे पक्ष की बात भी सुनी जानी चाहिए।

नड्डा बोले-हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान होना चाहिए

जेपी नड्डा ने कहा कि हम निश्चित रूप से देश के हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी बात का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए जो किसी राज्य, क्षेत्र या वहां की संस्कृति की वेशभूषा को लेकर अपमानजनक हो।

हालांकि, उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि मामले में भाजपा की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव का पक्ष भी सुना जाना चाहिए। नड्डा ने कहा कि सुष्मिता देव को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए और उन्हें सदन में बोलने की अनुमति दी जाए।

जॉन ब्रिटास ने जताई आपत्ति

सीपीआई एम सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में कथित टिप्पणी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उनका आरोप है कि एक महिला सांसद ने उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया।

इस टिप्पणी को लेकर सदन में विवाद बढ़ गया और कई सदस्यों ने अपनी-अपनी बात रखनी शुरू कर दी। मामला बढ़ने के बाद सदन में हंगामा और नारेबाजी होने लगी।

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रिजिजू बोले—दूसरा पक्ष भी रिकॉर्ड पर आना चाहिए

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस मामले में केवल एक पक्ष की बात सुनना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक सदस्य की ओर से दूसरे सदस्य पर आरोप लगाए जाने के बाद दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

रिजिजू ने कहा कि दूसरे पक्ष की बात भी सदन के रिकॉर्ड में आनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए और किसी एक सदस्य की शिकायत के आधार पर दूसरे सदस्यों को अपनी बात रखने से नहीं रोका जाना चाहिए।

बोले—सभी सदस्य समान भारतीय हैं

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के राष्ट्र की एकता के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि सदन में हर सदस्य समान है और सभी सदस्य भारतीय हैं।

रिजिजू ने कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को दूसरे सदस्य से अलग नहीं माना जा सकता। उन्होंने सदन की गरिमा और सभी सदस्यों के समान अधिकारों पर जोर दिया।

महिला सांसदों को भी बयान देने का अवसर देने की मांग

रिजिजू ने यह भी कहा कि इस मामले के संबंध में कुछ अन्य महिला सांसद अपनी बात रखना चाहती हैं। उन्होंने मांग की कि इन सांसदों के बयान को भी सदन के रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि सभी सदस्यों को समान अवसर मिलना संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना है। किसी मामले में यदि एक पक्ष अपनी बात रखता है तो दूसरे पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

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आपत्तिजनक टिप्पणी पर जांच की बात

जॉन ब्रिटास की आपत्ति का जवाब देते हुए रिजिजू ने सभापति से आग्रह किया कि यदि सदन में कोई ऐसी टिप्पणी की गई है जो आपत्तिजनक है या सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है, तो संबंधित सदस्य को सभापति के कक्ष में बुलाकर पूरे मामले को सुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले को दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही उचित तरीके से देखा जाना चाहिए।

हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित

‘लुंगीवाला’ टिप्पणी को लेकर राज्यसभा में विवाद बढ़ता गया। सदन में लगातार हंगामा और नारेबाजी होती रही। स्थिति को देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

फिलहाल विवाद का केंद्र कथित टिप्पणी, सदस्यों के सम्मान और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर दिए जाने को लेकर बना हुआ है। सदन में आगे की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे पर फिर से चर्चा होने की संभावना है।

 

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