मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने दिल्ली में चल रहे छात्र-युवा आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने के लिए उसे “उग्र आंदोलन” बताने की कोशिश कर रही है, जबकि धरने पर बैठे युवा पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर में शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे मीडिया से बातचीत करते हुए अपने आवास पर टिकैत ने कहा कि सरकार यह प्रचार कर रही है कि आंदोलन उग्र हो गया है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पत्थर या डंडा लेकर हिंसा करता दिखाई देता है तो उसे तुरंत पकड़ना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग आंदोलनकारी नहीं बल्कि आंदोलन को बदनाम करने वाले तत्व हो सकते हैं।
राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में चल रहा आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं का आंदोलन है, जिन्हें रोजगार नहीं मिला, जिनकी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और जिनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी नेता के भरोसे नहीं बल्कि विचारधारा के आधार पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा होगा तथा 15 अगस्त के बाद देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंचेगा। सरकार यदि इसे बलपूर्वक दबाने की कोशिश करेगी तो इससे नाराजगी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों का समाधान केवल बातचीत से निकल सकता है।
टिकैत ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है क्योंकि आंदोलन में शामिल युवा हर परिवार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे किसान परिवारों से जवान और पुलिसकर्मी निकलते हैं, वैसे ही यही युवा भी समाज का हिस्सा हैं और रोजगार की मांग कर रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई पर टिप्पणी करते हुए टिकैत ने कहा कि “पुलिस की वर्दी और डंडे में सरकार का चेहरा दिखाई देता है।” यदि पुलिस का व्यवहार सौम्य होगा तो लोग सरकार को भी संवेदनशील मानेंगे, लेकिन यदि बल प्रयोग होगा तो उसकी जिम्मेदारी भी सरकार पर ही आएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन स्थल पर सार्वजनिक शौचालय, मेट्रो स्टेशन और अन्य सुविधाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे विशेष रूप से महिला प्रदर्शनकारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। टिकैत ने कहा कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करने के बजाय दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है।
उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि किसानों को अपनी मांगें मनवाने के लिए 13 महीने तक आंदोलन करना पड़ा था। उनका कहना था कि यदि सरकार समय रहते युवाओं से संवाद नहीं करेगी तो असंतोष और व्यापक रूप ले सकता है।



