Home » उत्तर प्रदेश » श्रावस्ती में पंचायतों को ‘डिजिटल और आत्मनिर्भर’ बनाने की कवायद: ई-ग्राम स्वराज पर 15 अगस्त तक अपलोड होगी Q-GPDP, बाल-महिला हितैषी विजन पर जोर

श्रावस्ती में पंचायतों को ‘डिजिटल और आत्मनिर्भर’ बनाने की कवायद: ई-ग्राम स्वराज पर 15 अगस्त तक अपलोड होगी Q-GPDP, बाल-महिला हितैषी विजन पर जोर

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श्रावस्ती: ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर, पारदर्शी और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) भिनगा में आयोजित विकासखंड स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का वरिष्ठ फैकल्टी बृजेश कुमार पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस कार्यशाला में पंचायत सचिवों और पंचायत सहायकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के साथ ग्रामीण विकास का नया खाका (ब्लूप्रिंट) तैयार करने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई।

15 अगस्त 2026 तक ई-ग्राम स्वराज पर अपलोड करना अनिवार्य

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षक चंचल देवी ने ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की गुणवत्ता में सुधार के लिए जनसहभागिता को सबसे अनिवार्य तत्व बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम सभा की बैठकों का बकायदा अग्रिम शेड्यूल जारी किया जाए, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित हो।

चंचल देवी ने समय सीमा स्पष्ट करते हुए कहा:”सभी ग्राम पंचायतों के लिए शासन स्तर से यह कड़ा निर्देश है कि वर्ष 2026 की गुणवत्तापूर्ण ग्राम पंचायत विकास योजना (Q-GPDP) को हर हाल में 15 अगस्त 2026 तक ‘ई-ग्राम स्वराज पोर्टल’ पर लाइव अपलोड करना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत स्वच्छता के नए नियम शामिल

जिला कॉर्डिनेटर (स्वच्छ भारत मिशन) राज कुमार तिवारी ने पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (Solid and Liquid Waste Management) पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के विभिन्न आदेशों के अनुपालन में वर्ष 2026 में ग्रामीण स्वच्छता को लेकर कुछ नए और कड़े नियम लागू किए गए हैं। अब हर पंचायत को अपने बजट का एक निश्चित हिस्सा कचरा प्रबंधन, नालियों की सफाई और जल संरक्षण पर खर्च करना होगा, जिसे जीपीडीपी की मूल कार्ययोजना में शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

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GPDP के 8 चरण और डिजिटल पंचायत ब्लूप्रिंट की ट्रेनिंग

मुख्य प्रशिक्षक अनिल कुमार तिवारी ने कार्यशाला का सफल संचालन करते हुए प्रतिभागियों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया। उन्होंने प्रोजेक्टर के माध्यम से GPDP की 8 चरणीय प्रक्रिया, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), डिजिटल पंचायत ब्लूप्रिंट और ग्राम गरीबी निवारण योजना (VPRP) के एकीकरण का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि) की योजनाओं के अभिसरण (Convergence) से गांवों के विकास के लिए ज्यादा फंड जुटाया जा सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘पंचायत निर्णय ऐप’ के उपयोग से विकास कार्यों में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

बाल विवाह, बाल श्रम और घरेलू हिंसा के खिलाफ खुलेगा मोर्चा

“ग्राम पंचायतों को केवल बुनियादी ढांचे (सड़क-नाली) तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक रूप से सुरक्षित और न्यायसंगत बनाना होगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रावस्ती की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों और जरूरतमंदों को निशुल्क कानूनी (विधिक) सहायता दी जा रही है। पंचायत सहायकों की यह जिम्मेदारी है कि वे गांवों में बाल विवाह, बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम और घरेलू हिंसा जैसी कुरीतियों के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करें। हर पंचायत को ‘बाल हितैषी’ और ‘महिला हितैषी’ बनाने के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम करना होगा।” – श्रीमती अनुप्रिया, सचिव (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण)

इसके साथ ही जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती सपना यादव ने जीपीडीपी पोर्टल और ई-ग्राम स्वराज की तकनीकी बारीकियों को समझाया, जबकि जिला समन्वयक सी-3 ने स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े बजट को कार्ययोजना में प्राथमिकता देने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में सभी पंचायत सचिवों और सहायकों की तकनीकी शंकाओं का व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया गया।

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