- सुभाष चंद, गाजियाबाद से ‘द एक्स इंडिया‘ के लिए
गाजियाबाद के कौशांबी में यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हाल ही में हर्निया की रोबोटिक सर्जरी के बाद दो मरीजों उज्ज्वल चौधरी (35) और जिला जज आशीष गर्ग की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और रोबोटिक सर्जरी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
दोनों मामलों में मरीजों की मृत्यु सर्जरी के बाद जटिलताओं के कारण हुई, जिसके चलते परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। क्या रोबोटिक सर्जरी की तकनीक, चिकित्सकों का अनुभव या पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल में कमी इसके लिए जिम्मेदार है?

उज्ज्वल चौधरी मामला: लापरवाही के आरोप
मुजफ्फरनगर के भैंसी गांव निवासी उज्ज्वल चौधरी (35) को 26 मई 2025 को यशोदा हॉस्पिटल में हर्निया की रोबोटिक सर्जरी के लिए भर्ती किया गया। सामान्यतः एक घंटे की इस सर्जरी में 4.5 घंटे लगे, और परिजनों के अनुसार, सर्जरी के दौरान आंत में छेद होने की जटिलता उत्पन्न हुई।
अस्पताल ने दावा किया कि इसे ठीक कर लिया गया, लेकिन अगले दिन उज्ज्वल को पेट दर्द, सूजन और सांस लेने में तकलीफ हुई। 29 मई को दोबारा सर्जरी में 22 मिमी आंत का छेद और आंतरिक रिसाव पाया गया।
2 जून को कार्डियक अरेस्ट और किडनी फेल्योर के कारण उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने हंगामा किया और लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच समिति गठित की, लेकिन ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हुई।

जज आशीष गर्ग की मृत्यु
दूसरा मामला गाजियाबाद के जिला जज आशीष गर्ग का है, जिनकी हाल ही में हर्निया की रोबोटिक सर्जरी के बाद मृत्यु हुई। हालांकि इस मामले का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है, पर परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल पर फिर से लापरवाही का आरोप लगाया है।
दो हाई-प्रोफाइल मौतों ने यशोदा हॉस्पिटल की रोबोटिक सर्जरी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर लोग अस्पताल के प्रबंधन और सर्जनों की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे मरीजों में भय का माहौल है।
रोबोटिक सर्जरी की चुनौतियां
रोबोटिक सर्जरी को सटीक और न्यूनतम आक्रामक तकनीक माना जाता है, जो 3D विजन और उन्नत उपकरणों के साथ सर्जन को बेहतर नियंत्रण देती है। यशोदा हॉस्पिटल ने हाल ही में दुर्लभ स्पिंडल सेल सरकोमा के इलाज में रोबोटिक सर्जरी की सफलता का दावा किया था। लेकिन उज्ज्वल और आशीष के मामलों में संभावित कारणों में शामिल हैं:
सर्जन का अनुभव: रोबोटिक सर्जरी के लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। यदि सर्जन अपर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हो, तो जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
पोस्ट–ऑपरेटिव केयर: सर्जरी के बाद मॉनिटरिंग में कमी, जैसे आंतरिक रिसाव या संक्रमण की देरी से पहचान, मृत्यु का कारण बन सकती है।
तकनीकी खामी: मशीन की सेटिंग्स या सर्जरी के दौरान गलतियां, जैसे आंत का छेद, जोखिम बढ़ा सकती हैं।
मरीज की स्थिति: मरीज की पूर्व-मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, जैसे उज्ज्वल के मामले में मोटापा, जटिलताओं को बढ़ा सकती है।
अस्पताल का बयान और जांच
यशोदा हॉस्पिटल ने उज्ज्वल के मामले में दावा किया कि सर्जरी सफल रही थी, लेकिन पोस्ट-ऑपरेटिव जटिलताओं, जैसे पेरिटोनाइटिस और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर, के कारण मरीज को बचाया नहीं जा सका।
आशीष गर्ग के मामले में अस्पताल का आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग ने उज्ज्वल की मौत की जांच के लिए समिति गठित की है, जिसकी रिपोर्ट एक माह में अपेक्षित है।
पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर प्राथमिक जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन परिजनों का कहना है कि अस्पताल के रसूख के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है।
सामाजिक और चिकित्सकीय प्रभाव
इन घटनाओं ने रोबोटिक सर्जरी की सुरक्षा और निजी अस्पतालों में जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर #YashodaHospital और #RoboticSurgery जैसे हैशटैग के साथ लोग अपनी चिंता जता रहे हैं।
मरीजों और परिजनों में भय है कि क्या यशोदा हॉस्पिटल में रोबोटिक सर्जरी सुरक्षित है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी के लिए सख्त दिशानिर्देश, प्रशिक्षित सर्जन और मजबूत पोस्ट-ऑपरेटिव केयर जरूरी है। इन मामलों ने निजी अस्पतालों में पारदर्शिता और नियमन की मांग को तेज किया है।
स्वतंत्र जांच जरूरी!
यशोदा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में उज्ज्वल चौधरी और जज आशीष गर्ग की रोबोटिक सर्जरी के बाद मृत्यु ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या यह सर्जन की लापरवाही, तकनीकी खामी या अपर्याप्त देखभाल का परिणाम है? इन सवालों के जवाब के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।
मरीजों की सुरक्षा और विश्वास बहाली के लिए अस्पताल को पारदर्शी जवाबदेही दिखानी होगी। यह मामला न केवल यशोदा हॉस्पिटल, बल्कि पूरे देश में रोबोटिक सर्जरी के मानकों पर बहस को प्रेरित कर रहा है।
