Home » धर्म-कर्म » पंचमी तिथि में विष्णु-लक्ष्मी पूजा का महत्व, जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

पंचमी तिथि में विष्णु-लक्ष्मी पूजा का महत्व, जानें अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ, व्रत, यात्रा या अन्य धार्मिक गतिविधियों से पहले तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की वह पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन के धार्मिक और शुभ समय की जानकारी दी जाती है। एक अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा। इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दोपहर तक रहेगी और इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी।

पंचांग के अनुसार, एक अक्टूबर को पंचमी तिथि दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। आश्विन मास को सनातन परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है। इस महीने देवी उपासना के साथ पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मकांड भी किए जाते हैं। ऐसे में एक अक्टूबर का दिन पूजा, व्रत और आध्यात्मिक साधना के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुरुवार होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने और माता लक्ष्मी का ध्यान करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु को पीले फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं।

एक अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 9 बजकर 40 मिनट पर होगा और चंद्रमा अगले दिन सुबह 11 बजकर 58 मिनट पर अस्त होगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र रहेगा। सिद्धि योग शाम 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। करण तैतिल रहेगा। ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेंगे।

ALSO READ THIS :  मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए उत्तम दिन, यात्रा से पहले जान लें दिशाशूल

शुभ मुहूर्त की बात करें तो एक अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में अभिजीत मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में माना जाता है। इसकी अवधि करीब 48 मिनट होती है और इस दौरान शुभ कार्यों की शुरुआत करना फलदायी माना जाता है।

वहीं, राहुकाल दोपहर 1 बजकर 45 मिनट से 3 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल के दौरान किसी नए या महत्वपूर्ण शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि नियमित पूजा और पहले से चल रहे धार्मिक कार्यों के लिए राहुकाल को उसी तरह बाध्यकारी नहीं माना जाता है।

दिशाशूल की बात करें तो गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी कारणवश दक्षिण दिशा की यात्रा करना जरूरी हो, तो परंपरागत मान्यताओं में बताए गए उपायों का पालन करके यात्रा की जा सकती है।

एक अक्टूबर का दिन आश्विन मास, पंचमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और गुरुवार के संयोग के कारण धार्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, व्रत तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल का ध्यान रखना पंचांग आधारित परंपरा का हिस्सा है।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें