दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में इसे सुख, समृद्धि, वैभव और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, सुंदर तथा दीपों से प्रकाशित घरों में विराजमान होकर भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि दीपावली पर घरों के साथ-साथ दुकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यालयों में भी विशेष रूप से लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाता है।
इस बार 8 नवंबर, रविवार को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए पूजा के कुल नौ शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। अलग-अलग कार्यक्षेत्रों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और गृहस्थों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी सुविधा और निर्धारित शुभ मुहूर्त के अनुसार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं।
खास बात यह है कि पूजा के लिए घंटों की लंबी प्रक्रिया अपनाना जरूरी नहीं है। श्रद्धालु आवश्यक सामग्री पहले से जुटाकर और पूजा की प्रमुख विधियों का पालन करते हुए लगभग 10 मिनट में भी संक्षिप्त लक्ष्मी-गणेश पूजन कर सकते हैं। इसमें भगवान का आह्वान, स्नान, तिलक, पुष्प अर्पण, अष्टलक्ष्मी का स्मरण, नैवेद्य और आरती शामिल हैं।
घर, दुकान और ऑफिस के लिए नौ शुभ मुहूर्त
दीपावली पर अलग-अलग कार्यों और वर्गों के अनुसार पूजा के शुभ समय बताए गए हैं। दुकानदारों और नया स्टार्टअप शुरू करने वाले लोगों के लिए सुबह 8 बजकर 10 मिनट से 9 बजकर 40 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और किसानों के लिए सुबह 9 बजकर 40 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक पूजा का समय निर्धारित किया गया है।
हॉस्पिटल, क्लीनिक, मेडिकल और अन्य निजी कार्यालयों में पूजा करने वालों के लिए सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक अमृत मुहूर्त रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है।
विद्यार्थियों के लिए दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से 2 बजकर 58 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। गृहस्थों के लिए शाम 5 बजकर 49 मिनट से रात 8 बजकर 59 मिनट तक शुभ और अमृत मुहूर्त रहेगा। साधक, उपासक और आश्रमों में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए शाम 5 बजकर 41 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक प्रदोष काल का समय बताया गया है।
लग्न के अनुसार पूजा करने वाले व्यापारियों और नवविवाहित जोड़ों के लिए शाम 6 बजकर 9 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। वहीं विदेशों में कारोबार करने वाले और एनआरआई श्रद्धालुओं के लिए रात 12 बजकर 37 मिनट से 2 बजकर 49 मिनट तक सिंह लग्न का समय बताया गया है।
पूजा से पहले जुटा लें सभी जरूरी सामग्री
लक्ष्मी-गणेश पूजन शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक स्थान पर रख लेना बेहतर रहता है, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर, पूजा का आसन, लाल कपड़ा, जल से भरे छोटे और बड़े तांबे के लोटे, तांबे की चम्मच, दो तांबे की प्लेट, छोटी थाली, पूजा की घंटी और कलश की व्यवस्था करें।
इसके अतिरिक्त अबीर, गुलाल, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, अष्टगंध, जनेऊ, नारियल, पान के पत्ते, इत्र, केसर, पंचामृत, फूल और मौली भी रखें। पूजा में कपूर, रुई की बत्ती, दीपक, घी और अगरबत्ती की आवश्यकता होगी। भगवान को भोग लगाने के लिए फल, मिठाई, खीर, लौंग और इलायची भी पहले से तैयार रखें।
गणेश-लक्ष्मी का ध्यान कर करें पूजा की शुरुआत
पूजा के लिए सबसे पहले घर के पूजा स्थल अथवा प्रतिष्ठान को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए उनका आह्वान करें। हाथ में अक्षत लेकर भगवान से पूजा में विराजमान होने और कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें। इसके बाद उन्हें आसन अर्पित करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्रों का उच्चारण करें।
दूध, जल और पंचामृत से कराएं अभिषेक
आह्वान के बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को स्नान कराने की प्रक्रिया शुरू करें। सबसे पहले दूध और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत अर्पित करें। पंचामृत से स्नान कराने के बाद दोबारा शुद्ध जल से अभिषेक कराएं।
इसके बाद एक कटोरी में जल लेकर उसमें थोड़ा कुमकुम और चंदन मिलाएं तथा सुगंधित जल अर्पित करें। इत्र का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद भगवान को स्वच्छ वस्त्र अर्पित करें। अभिषेक के दौरान श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश और लक्ष्मी मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
तिलक, अक्षत और पुष्प अर्पित कर करें पूजन
अभिषेक के बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। इसके साथ जनेऊ, हल्दी, अबीर, गुलाल और अष्टगंध चढ़ाएं। मां लक्ष्मी को कमल का फूल प्रिय माना जाता है, इसलिए संभव हो तो कमल सहित सुगंधित पुष्प अर्पित करें।
पूजा के दौरान मौली और अन्य पूजन सामग्री भी श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। प्रत्येक सामग्री चढ़ाते समय भगवान का स्मरण और संबंधित मंत्रों का उच्चारण करना शुभ माना जाता है।
अष्टलक्ष्मी पूजन से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना
दीपावली पर मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का स्मरण करते हुए अष्टलक्ष्मी पूजन करने की भी परंपरा है। अष्टलक्ष्मी के स्वरूपों में आदिलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी, सौभाग्यलक्ष्मी, अमृतलक्ष्मी, कमललक्ष्मी, सत्यलक्ष्मी, भोगलक्ष्मी और योगलक्ष्मी का स्मरण किया जाता है।
श्रद्धालु मां लक्ष्मी के इन स्वरूपों का ध्यान करते हुए अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इस दौरान परिवार में सुख-शांति, ज्ञान, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि बनाए रखने की कामना करें। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के समक्ष धूप और दीप जलाकर मंत्रों का जाप करें।
फल, मिठाई और खीर का लगाएं भोग
पूजन के अगले चरण में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसके लिए फल, मिठाई, खीर, लौंग और इलायची का भोग लगाएं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य सात्विक पकवान भी अर्पित कर सकते हैं।
भोग लगाने के बाद तांबे की प्लेट में पांच बार जल अर्पित करते हुए प्राणाय स्वाहा, अपानाय स्वाहा, व्यानाय स्वाहा, उदानाय स्वाहा और समानाय स्वाहा मंत्रों का उच्चारण करें। इसके बाद ब्रह्मणे नमः और ब्रह्म भूर्भुवः स्वः मंत्र का स्मरण करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करने के बाद भगवान को प्रणाम कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।
धूप-दीप के साथ करें मां लक्ष्मी और गणेश की आरती
पूजा के अंतिम चरण में कपूर और घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की आरती करें। आरती के दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ शामिल होकर मां लक्ष्मी का स्मरण करें। इसके बाद भगवान को प्रणाम कर परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और उन्नति की प्रार्थना करें।
आरती के बाद सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन और अन्य प्रमुख स्थानों पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपों से प्रकाशित घर में सकारात्मकता और शुभता का वातावरण बनता है।
मां लक्ष्मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता।
ॐ जय लक्ष्मी माता।
स्वच्छता और श्रद्धा के साथ मनाएं दीपावली
दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का धार्मिक महत्व होने के साथ ही यह पर्व परिवार को एकजुट करने और आपसी प्रेम एवं सद्भाव बढ़ाने का भी संदेश देता है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे घर और प्रतिष्ठानों में स्वच्छता बनाए रखते हुए श्रद्धा के साथ पूजा करें। दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीपक जलाकर पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखें और आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें।
इस प्रकार शुभ मुहूर्त में विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक लक्ष्मी-गणेश पूजन कर श्रद्धालु दीपावली का पर्व मना सकते हैं।

