नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, यात्रा अथवा महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करता है।
11 सितंबर 2026 शुक्रवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। भाद्रपद अमावस्या होने के कारण इस दिन पितरों के तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना गया है।
पितरों के तर्पण और दान के लिए विशेष दिन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण और पिंडदान करने के साथ जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है।
मान्यता है कि अमावस्या पर पितरों का स्मरण और तर्पण करने से पितृ दोष से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि भाद्रपद अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
11 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:16 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:31 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 6:09 बजे और चंद्रास्त शाम 6:39 बजे होगा।
दिन की शुरुआत धार्मिक कार्यों और पूजा पाठ के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे तक होने के कारण इस अवधि में पितरों से संबंधित धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं।
नक्षत्र में होगा बदलाव
पंचांग के अनुसार शुक्रवार को सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा दोपहर 1:16 बजे तक पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर दिन के विभिन्न कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है।
साध्य योग के बाद बनेगा शुभ योग
11 सितंबर को शाम 5:02 बजे तक साध्य योग रहेगा। इसके बाद शुभ योग प्रारंभ हो जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ योग को कई प्रकार के धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है।
इसके अलावा अमृत काल सुबह 7:03 बजे से 8:36 बजे तक रहेगा। इस अवधि को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहुकाल में नए कार्य शुरू करने से बचने की मान्यता
शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 7:47 बजे से 9:19 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 3:27 बजे से शाम 4:59 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि धार्मिक परंपराओं में इन समयों को लेकर अलग-अलग मत भी पाए जाते हैं।
सिंह राशि में रहेगा सूर्य, रात में राशि परिवर्तन
11 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा। रात 7:08 बजे तक सूर्य सिंह राशि में रहने के बाद कन्या राशि में प्रवेश करेगा।
ग्रहों की स्थिति में होने वाले इन बदलावों को ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग माना जाता है।
दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल
पंचांग के अनुसार शुक्रवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी कारण से दक्षिण दिशा की यात्रा करना जरूरी हो तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ उपाय करके यात्रा शुरू करने की परंपरा है। हालांकि इन उपायों को आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय माना जाता है।
11 सितंबर का प्रमुख पंचांग
तिथि भाद्रपद कृष्ण अमावस्या सुबह 8:56 बजे तक, इसके बाद प्रतिपदा
वार शुक्रवार
सूर्योदय सुबह 6:16 बजे
सूर्यास्त शाम 6:31 बजे
चंद्रोदय सुबह 6:09 बजे
चंद्रास्त शाम 6:39 बजे
नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी, दोपहर 1:16 बजे के बाद उत्तर फाल्गुनी
योग साध्य शाम 5:02 बजे तक, इसके बाद शुभ
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
अमृत काल सुबह 7:03 बजे से 8:36 बजे तक
राहुकाल सुबह 10:51 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक
गुलिक काल सुबह 7:47 बजे से 9:19 बजे तक
यमगंड काल दोपहर 3:27 बजे से शाम 4:59 बजे तक
सूर्य राशि सिंह, रात 7:08 बजे के बाद कन्या
दिशाशूल दक्षिण दिशा
भाद्रपद अमावस्या के कारण 11 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। पितरों के तर्पण, पिंडदान और दान पुण्य के साथ दिन के शुभ मुहूर्त और पंचांग में दिए गए समय का ध्यान रखकर धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं।

