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कृतिका नक्षत्र और व्याघात योग का संयोग, जानें अभिजित मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर दिन के शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। इस दिन कृतिका नक्षत्र, व्याघात योग और विष्टि करण का संयोग बन रहा है। गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए भी यह दिन विशेष माना जाता है।

कृतिका की अग्नि, व्याघात का प्रभाव और गुरुवार की भक्ति… जानिए 3 सितंबर का पूरा पंचांग

पंचांग के अनुसार 3 सितंबर को कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। सप्तमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगी। इस दिन कृतिका नक्षत्र का प्रभाव रात करीब 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र में परिवर्तन होगा।

ज्योतिषीय परंपराओं में कृतिका नक्षत्र को ऊर्जा, साहस, दृढ़ता और आत्मबल से जोड़कर देखा जाता है। वहीं व्याघात योग को ऐसा योग माना जाता है जिसमें महत्वपूर्ण कार्यों को लेकर सावधानी बरतना उचित रहता है। विष्टि करण को भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

नए काम की शुरुआत से पहले मुहूर्त का रखें ध्यान

3 सितंबर को व्याघात योग और विष्टि करण का संयोग होने के कारण नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से पहले शुभ मुहूर्त का विचार करना उचित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी बड़े कार्य के लिए केवल दिन ही नहीं, बल्कि उस समय की तिथि, नक्षत्र, योग और करण को भी ध्यान में रखा जाता है।

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धार्मिक आस्था रखने वाले लोग महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए पंचांग में दिए गए अनुकूल समय का चयन कर सकते हैं।

अभिजित मुहूर्त में रहेगा करीब 50 मिनट का शुभ समय

3 सितंबर को अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 33 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। धार्मिक परंपराओं में अभिजित मुहूर्त को महत्वपूर्ण और शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।

हालांकि किसी विशेष संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त का निर्धारण करना अधिक उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि स्थान के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर हो सकता है।

राहुकाल में शुभ कार्यों से बचने की मान्यता

गुरुवार, 3 सितंबर को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।

इसके अलावा यमगंड सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 8 बजकर 49 मिनट से 10 बजकर 24 मिनट तक रहने वाला है। शुभ कार्यों की योजना बनाने वाले लोग इन समयों को ध्यान में रख सकते हैं।

गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं और मंत्र जाप, ध्यान तथा दान पुण्य जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।

धार्मिक परंपराओं में गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करना, पीली वस्तुओं का दान करना और भगवान विष्णु को पीले फूल या पीले रंग का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार भगवान विष्णु तथा बृहस्पति देव की आराधना कर सकते हैं।

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दक्षिण दिशा में रहेगा दिशाशूल, यात्रा में सावधानी की मान्यता

पंचांग के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना कष्टकारी या अशुभ माना जाता है।

यदि किसी कारण से दक्षिण दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो तो धार्मिक परंपराओं में बताए गए पारंपरिक उपायों का पालन किया जाता है। यात्रा के लिए शुभ समय का विचार भी किया जा सकता है।

3 सितंबर को दिनभर पंचांग के इन समयों पर रहेगी नजर

3 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी। कृतिका नक्षत्र रात करीब 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। व्याघात योग और विष्टि करण का संयोग भी इसी दिन रहेगा।

अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 33 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 15 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 8 बजकर 49 मिनट से 10 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

पंचांग में बताए गए ये समय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं। अलग अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त और काल की गणना में थोड़ा बदलाव संभव है। किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित माना जाता है।

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