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पश्चिम दिशा में यात्रा से बचें, सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 तक अभिजीत मुहूर्त

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से पहले पंचांग के माध्यम से तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न मुहूर्तों की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल-गणना की ऐसी पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है।

2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि सुबह 10:15 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। सूर्योदय सुबह 6:22 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:41 बजे तथा चंद्रास्त दोपहर 1:00 बजे होगा।

हस्त नक्षत्र में रहेंगे सूर्य

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त को 27 नक्षत्रों में 13वां नक्षत्र माना गया है। इसका अर्थ ‘हाथ’ बताया जाता है और इसके स्वामी चंद्रमा हैं। हस्त नक्षत्र कन्या राशि से संबंधित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है।

रात 8:52 बजे तक रहेगा हर्षण योग

शुक्रवार को हर्षण योग रात 8:52 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में हर्षण को 27 नित्य योगों में 14वां योग माना जाता है। ‘हर्षण’ का अर्थ खुशी, प्रसन्नता या आनंद से जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस योग को शुभ माना जाता है और विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, उत्सव तथा नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल बताया जाता है।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 बजे तक

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। पंचांग परंपरा में इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में शामिल किया जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

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अमृतकाल सुबह 6:40 से 8:10 बजे तक

शुक्रवार को अमृतकाल सुबह 6:40 बजे से 8:10 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्य, व्यापार से जुड़े निर्णय तथा अन्य शुभ कार्य करने की परंपरा है।

सुबह 10:47 बजे से रहेगा राहुकाल

इस दिन राहुकाल सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए। हालांकि इस दौरान पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

गुलिक काल सुबह 7:51 से 9:19 बजे तक

शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा में गुलिक काल को शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।

यमगंड काल दोपहर 3:13 से 4:41 बजे तक

इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:41 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस अवधि में नए कार्य शुरू करने और महत्वपूर्ण यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

कन्या राशि में रहेंगे सूर्य

शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में रहने की अवधि में व्यावहारिकता, योजनाबद्ध तरीके से काम करने और कार्यों को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है।

दोपहर 3:40 बजे तक वृषभ राशि में चंद्रमा

इस दिन चंद्रमा दोपहर 3:40 बजे तक वृषभ राशि में रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में वृषभ राशि को चंद्रमा की उच्च राशि माना जाता है। इसके बाद चंद्रमा राशि परिवर्तन करेंगे।

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पश्चिम दिशा में रहेगा दिशाशूल

शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार जिस दिशा में दिशाशूल हो, उस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि दिशाशूल से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित हैं।

2 अक्टूबर 2026 के प्रमुख समय

सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे
सूर्यास्त: शाम 6:09 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: सुबह 10:15 बजे
सप्तमी तिथि प्रारंभ: सुबह 10:15 बजे
चंद्रोदय: रात 10:41 बजे
चंद्रास्त: दोपहर 1:00 बजे
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
अमृतकाल: सुबह 6:40 बजे से 8:10 बजे तक
राहुकाल: सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:51 बजे से 9:19 बजे तक
यमगंड काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:41 बजे तक
हर्षण योग: रात 8:52 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा

 

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