नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य की शुरुआत, यात्रा, पूजा-पाठ, निवेश और धार्मिक अनुष्ठान से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल गणना की वह पारंपरिक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन के धार्मिक और ज्योतिषीय समय का निर्धारण करती है।
बुधवार 2 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि अगले दिन सुबह 4:26 बजे तक रहेगी। इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। इस दिन हलषष्ठी यानी हरछठ का व्रत रखा जाएगा। संतान की लंबी आयु, सुख और रक्षा की कामना से माताएं इस व्रत को करती हैं।
हलषष्ठी पर भगवान बलराम और हल की पूजा
हलषष्ठी व्रत को संतान के कल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान बलराम और हल की पूजा की जाती है। इसके साथ ही सात प्रकार के अनाज और पसई के चावल की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
हलषष्ठी के दिन माताएं संतान की दीर्घायु और उनकी सुरक्षा की कामना से व्रत रखती हैं। पूजा के लिए बुधवार को सुबह 5:59 बजे से सुबह 9:10 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ बताया गया है।
सूर्योदय से चंद्रोदय तक जानिए दिन का समय
2 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6:13 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:40 बजे होगा। चंद्रमा का उदय रात 9:58 बजे होगा और अगले दिन सुबह 11:54 बजे चंद्रास्त होगा।
दिन की शुरुआत धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अनुष्ठान के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। हलषष्ठी व्रत रखने वाले श्रद्धालु शुभ समय में पूजा कर सकते हैं।
अश्विनी के बाद भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा चंद्रमा
पंचांग के अनुसार बुधवार को सूर्य पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। वहीं चंद्रमा सुबह 2:42 बजे तक अश्विनी नक्षत्र में रहेगा। इसके बाद चंद्रमा भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
इस दिन ध्रुव योग रहेगा। पंचांग में ध्रुव योग को स्थिरता और दृढ़ता से जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त में बनेंगे शुभ कार्यों के अवसर
2 सितंबर को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं में अभिजित मुहूर्त को दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है।
इसके अलावा अमृत काल रात 8:44 बजे से रात 10:16 बजे तक रहेगा। धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए इन समयों को विशेष महत्व दिया जाता है।
राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचें
बुधवार को राहुकाल दोपहर 12:26 बजे से 1:59 बजे तक रहेगा। वहीं गुलिक काल सुबह 10:53 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक और यमगंड काल सुबह 7:46 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा।
पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसलिए इन अवधियों में नए कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्य सिंह और चंद्रमा मेष राशि में रहेगा
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 2 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। ग्रहों की स्थिति का प्रभाव ज्योतिषीय गणनाओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। पारंपरिक ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी कारणवश उत्तर दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो तो मान्यतानुसार विशेष ज्योतिषीय उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है।
हलषष्ठी पर संतान की सलामती की कामना, शुभ मुहूर्त से लेकर राहुकाल तक जानिए 2 सितंबर का पूरा पंचांग
2 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व वाला रहेगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर हलषष्ठी व्रत के साथ भगवान बलराम और हल की पूजा की जाएगी। संतान के सुख, स्वास्थ्य, लंबी आयु और सुरक्षा की कामना से माताएं व्रत रखेंगी। वहीं शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखते हुए पूजा तथा अन्य कार्य करने से दिन की धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जा सकता है।



