Home » धर्म-कर्म » आश्विन कृष्ण नवमी पर बन रहे शुभ-अशुभ योग, जानें सूर्य-चंद्रमा की चाल

आश्विन कृष्ण नवमी पर बन रहे शुभ-अशुभ योग, जानें सूर्य-चंद्रमा की चाल

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली। आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि 4 अक्टूबर को रहेगी। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 7 बजकर 54 मिनट और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 23 मिनट पर होगा। हिंदू पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की गति एवं स्थिति के आधार पर तैयार की जाने वाली कालगणना पद्धति है, जिसके आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं।

4 अक्टूबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हस्त 27 नक्षत्रों में 13वां नक्षत्र है और इसका अर्थ ‘हाथ’ माना जाता है। इसके स्वामी चंद्रमा हैं, जबकि हस्त नक्षत्र कन्या राशि से संबंधित है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है।

इस दिन परिघ योग सुबह 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। वैदिक पंचांग में परिघ 27 नित्य योगों में 19वां योग माना जाता है। ‘परिघ’ का अर्थ मुख्य द्वार या द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ से है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे बाधा और अवरोध से जोड़कर देखा जाता है। इस योग के स्वामी शनि और अधिष्ठाता देवता भगवान विश्वकर्मा माने जाते हैं।

4 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। हिंदू ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल समय माना जाता है। यह दिन के मध्य में पड़ने वाला मुहूर्त है और इसकी अवधि सामान्यतः करीब 48 मिनट होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्यों में सफलता प्राप्त होने की संभावना रहती है।

ALSO READ THIS :  मुज़फ्फरनगर: विवादित मस्जिद के सामने हनुमान चालीसा पाठ की घोषणा

अमृतकाल शाम 6 बजकर 27 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, नए कार्य, व्यापार, निवेश या महत्वपूर्ण कार्य करने को अनुकूल माना जाता है।

राहुकाल शाम 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि इस दौरान पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं। राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

गुलिक काल शाम 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है, जबकि पहले से चल रहे कार्य किए जा सकते हैं।

यमगंड काल दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में यमगंड को नए कार्य या यात्रा शुरू करने के लिए अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से बचने की परंपरा है।

ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कन्या राशि में सूर्य की स्थिति के दौरान व्यावहारिकता, योजनाबद्ध तरीके से काम करने और कार्यों को व्यवस्थित करने पर जोर रहता है।

चंद्रमा 4 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 1 मिनट तक मिथुन राशि में रहेंगे। इसके बाद चंद्रमा कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष के अनुसार मिथुन राशि में चंद्रमा की स्थिति को संवाद और बौद्धिक सक्रियता से जोड़ा जाता है, जबकि कर्क राशि में प्रवेश के बाद भावनात्मक पक्ष अधिक प्रभावी माना जाता है।

ALSO READ THIS :  गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज का संयोग, जानें 14 सितंबर का पंचांग और शुभ मुहूर्त

कर्क राशि चंद्रमा की स्वराशि मानी जाती है। इसलिए चंद्रमा के कर्क राशि में प्रवेश को मन, भावनाओं, परिवार और निजी संबंधों से जोड़कर देखा जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस दौरान व्यक्ति परिवार और अपनों के साथ समय बिताने तथा भावनात्मक संतुलन की ओर अधिक ध्यान दे सकता है।

इस प्रकार 4 अक्टूबर को एक ओर अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल जैसे शुभ समय रहेंगे, वहीं राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड जैसे कालखंडों को ज्योतिषीय मान्यताओं में नए शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना गया है। अलग-अलग मुहूर्तों के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है।

[wonderplugin_slider id=1]

टॉप स्टोरी

ज़रूर पढ़ें