नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। किसी भी शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, यात्रा या निवेश से पहले पंचांग देखकर तिथि, नक्षत्र, योग, करण और शुभ-अशुभ समय की जानकारी ली जाती है। पंचांग हिंदू काल-गणना की ऐसी पारंपरिक पद्धति है, जो मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तैयार की जाती है।
15 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। पंचमी तिथि के साथ ही इस दिन ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है।
आत्मशुद्धि और सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता का पर्व
ऋषि पंचमी का व्रत मुख्य रूप से आत्मशुद्धि और सप्तऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाएं अनजाने में हुई अशुद्धियों या दोषों से मुक्ति की कामना के लिए इस दिन व्रत रखती हैं और सप्तऋषियों की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
इस दिन श्रद्धालु धार्मिक नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना करते हैं और ऋषियों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। पंचमी तिथि शुरू होने के बाद ऋषि पंचमी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
15 सितंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 27 मिनट पर होने का अनुमान है। दिन के समय धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जा सकता है।
इस दिन चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 9 बजकर 1 मिनट पर होने का अनुमान है।
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा सूर्य
पंचांग के अनुसार 15 सितंबर को सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। दिन में ऐन्द्र योग दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इसके बाद वैधृति योग शुरू हो जाएगा।
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में पंचांग के योग और नक्षत्रों को दिन के कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी आधार पर शुभ समय और अन्य काल की गणना की जाती है।
अभिजीत मुहूर्त में किए जा सकते हैं शुभ कार्य
15 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। परंपरागत रूप से अभिजीत मुहूर्त को दिन के सबसे शुभ समय में से एक माना जाता है। इस दौरान शुभ और महत्वपूर्ण कार्य करने की धार्मिक मान्यता है।
इसके अलावा अमृत काल सुबह 6 बजे से 7 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि को भी शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहुकाल में नए काम शुरू करने से बचने की मान्यता
पंचांग के अनुसार 15 सितंबर को राहुकाल दोपहर 3 बजकर 24 मिनट से शाम 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से 1 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
यमगंड काल सुबह 9 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
सूर्य सिंह और चंद्रमा तुला राशि में
15 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा तुला राशि में रहेगा। पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को दिन के धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
उत्तर दिशा में रहेगा दिशाशूल
इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहने की बात पंचांग में कही गई है। ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
यदि किसी कारणवश उत्तर दिशा की यात्रा करना आवश्यक हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष उपायों के बाद यात्रा शुरू की जा सकती है। हालांकि ऐसे उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
15 सितंबर का पंचांग एक नजर में
15 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक चतुर्थी तिथि रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि शुरू होगी। इसी पंचमी तिथि पर ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सप्तऋषियों की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
सूर्योदय सुबह 6 बजकर 17 मिनट, सूर्यास्त शाम 6 बजकर 27 मिनट, चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 55 मिनट और चंद्रास्त रात 9 बजकर 1 मिनट पर होगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जबकि राहुकाल दोपहर 3 बजकर 24 मिनट से शाम 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।

