मुज़फ़्फ़रनगर। सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश लेकर आर्य समाज की ओर से हरिद्वार से शुरू की गई जन जागरण यात्रा मुज़फ़्फ़रनगर पहुंची। नई मंडी स्थित आर्य समाज मंदिर में यात्रा के पहुंचने पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें आर्य समाज से जुड़े लोगों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक किया गया और समाज में आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान आर्य समाज के धर्मगुरु स्वामी विश्व सरस्वती ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत ऋषि-मुनियों और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की संस्कृति का देश है। उन्होंने कहा कि इस संस्कृति का संरक्षण करना यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना को यात्रा का आधार बताते हुए कहा कि आर्य समाज की संस्कृति सभी जीव-जंतुओं और प्राणियों के प्रति प्रेम और सद्भाव की भावना रखने वाली है।
स्वामी विश्व सरस्वती ने कहा कि आर्य समाज जात-पात को नहीं मानता और धरती पर रहने वाले सभी मनुष्यों को समान मानता है। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े नेता गुरुकुल और आर्य समाज की शिक्षा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लाल बहादुर शास्त्री सहित कई नेताओं का उदाहरण देते हुए आर्य समाज की शिक्षा परंपरा का उल्लेख किया।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सनातन धर्म और इस्लाम के इतिहास को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का कोई एक संस्थापक नहीं है और यह प्राचीन काल से चला आ रहा है, जबकि इस्लाम की स्थापना पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी है। उन्होंने सनातन धर्म के संरक्षण के लिए समाज को समर्पित रहने की बात कही।
सहारनपुर में अवैध निर्माण को लेकर मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े सवाल पर स्वामी विश्व सरस्वती ने कहा कि अवैध निर्माण कहीं भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने ऐसी कार्रवाई का स्वागत करने की बात कही।
उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर भी बयान दिया। स्वामी विश्व सरस्वती ने दावा किया कि देश में ही नहीं, पाकिस्तान तक में यह मांग उठ रही है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाया जाए। उन्होंने कहा कि साधु समाज इसका स्वागत करेगा।
आर्य समाज की ओर से बताया गया कि जन जागरण यात्रा 22 अगस्त को हरिद्वार से शुरू हुई थी। यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों से होकर गुजरेगी और 2 अक्टूबर को दिल्ली में समाप्त होगी।

