बाराबंकी। घाघरा नदी का जलस्तर भले ही कुछ कम हुआ हो, लेकिन बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र में नदी की धार अब भी तबाही मचा रही है। हेतमापुर गांव में तेज कटान के चलते एक के बाद एक मकान नदी की धारा में समाते जा रहे हैं। किसी के सामने उसका आशियाना भरभराकर नदी में गिर रहा है तो कोई अपनी जिंदगी भर की कमाई को बचाने के लिए घर का सामान बाहर निकालने में जुटा है।
गांव में हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि कई परिवार अपने घरों को खुद तोड़ने को मजबूर हैं, ताकि मकान के मलबे और अंदर रखा सामान पूरी तरह नदी की भेंट न चढ़ जाए। प्रशासन के मुताबिक अब तक 10 पक्के मकान नदी में समा चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता अब हेतमापुर के प्रसिद्ध श्री बाबा नारायण दास मंदिर और उसके ठीक बगल स्थित मस्जिद को लेकर है। दोनों धार्मिक स्थल घाघरा की कटान की जद में बताए जा रहे हैं।
जलस्तर घटा, लेकिन कटान का कहर बरकरार
घाघरा नदी फिलहाल खतरे के निशान से करीब 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन नदी की धार और कटान अब भी बेहद खतरनाक बनी हुई है। नदी लगातार जमीन को काट रही है और देखते ही देखते बड़े-बड़े हिस्से पानी में समा जा रहे हैं।
हेतमापुर में नदी की धारा आबादी की ओर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि अगला नंबर किस घर का होगा। कई परिवार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं, जबकि कुछ लोग मजबूरी में अपने आशियाने को खुद ही गिरा रहे हैं।
आंखों के सामने उजड़ रहे आशियाने
बाढ़ और कटान ने ग्रामीणों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिन घरों में परिवारों ने वर्षों तक जीवन बिताया, उन्हें अपनी आंखों के सामने नदी में समाते देखना लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है। गांव में जगह-जगह सामान बाहर निकालते परिवार और कटान की ओर बढ़ती नदी का खौफनाक मंजर दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धारा इतनी तेजी से जमीन काट रही है कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिल रहा। कुछ ही समय में जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में चला जाता है और उसके साथ लोगों के घर भी बह जाते हैं।
मंदिर और मस्जिद पर मंडरा रहा कटान का खतरा
हेतमापुर में अब सबसे बड़ी चिंता श्री बाबा नारायण दास मंदिर को लेकर है। घाघरा की धारा मंदिर के बेहद करीब पहुंच चुकी है। मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद भी कटान की संभावित जद में बताई जा रही है। दोनों धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर और मस्जिद गांव की पुरानी पहचान का हिस्सा हैं। ऐसे में इनके आसपास नदी की धारा पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
बाढ़ खंड के अधिकारी युद्ध स्तर पर जुटे
लगातार हो रही कटान को रोकने के लिए जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय हैं। बाढ़ खंड के अधिकारी और कर्मचारी कटान रोकने के लिए बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। एसडीएम भी मौके पर पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि नदी की धारा को आबादी और दोनों धार्मिक स्थलों तक पहुंचने से रोका जा सके। कटान प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार बचाव कार्य तेज करने की बात कही गई है।
प्रभावित परिवारों को भोजन और आर्थिक सहायता का भरोसा
एसडीएम आकांक्षा गुप्ता ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जिन परिवारों के घर नदी के कटान में पूरी तरह चले गए हैं, उनके रहने की व्यवस्था भी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि अब तक 10 पक्के मकान नदी में समा चुके हैं। नदी का जलस्तर कम जरूर हुआ है, लेकिन कटान अभी जारी है। बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीम कटान रोकने के लिए लगातार काम कर रही है।
‘घबराएं नहीं, प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा’
एसडीएम ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कटान रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। यदि किसी घर को कटान से नुकसान पहुंचता है तो प्रभावित परिवार को प्रशासन की ओर से मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
मंदिर और मस्जिद को बचाने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जाने का दावा प्रशासन की ओर से किया गया है। एसडीएम के मुताबिक करीब 20 साल बाद नदी की धारा गांव की तरफ आई है। ऐसे में प्रशासन का पूरा प्रयास है कि कटान से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
पीड़िता बोलीं- जन्म से जिस घर में रही, वही आज नदी में चला गया
बाढ़ पीड़ित सुनीता ने अपना दर्द बयां करते हुए प्रशासन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस घर में उनका जन्म हुआ और जहां उन्होंने अपना बचपन बिताया, वही घर आज घाघरा नदी में समा गया है।
सुनीता ने आरोप लगाया कि बाढ़ की स्थिति पर शासन-प्रशासन का पर्याप्त ध्यान नहीं है। उन्होंने सरकार से प्रभावित परिवारों को घर बनाने के लिए जमीन और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि, उनके द्वारा गांव में चार लोगों की मौत के संबंध में किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों को भरोसा- मंदिर और मस्जिद को नहीं होने देंगे नुकसान
स्थानीय निवासी शत्रुघ्न ने कहा कि नदी की धारा मंदिर और मस्जिद के पास जरूर पहुंच गई है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि दोनों धार्मिक स्थल सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर और मस्जिद काफी पुराने हैं और ग्रामीणों की आस्था से जुड़े हुए हैं।
फिलहाल हेतमापुर में हर गुजरते घंटे के साथ ग्रामीणों की चिंता बढ़ रही है। एक ओर नदी का जलस्तर कुछ कम हुआ है, तो दूसरी ओर कटान की रफ्तार ने खतरा बरकरार रखा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आबादी के साथ-साथ मंदिर और मस्जिद को घाघरा की तेज धार से सुरक्षित बचाने की है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रयास नदी की दिशा को कितना मोड़ पाते हैं और कटान से होने वाली तबाही पर कब तक काबू पाया जा सकता है।

