मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर के छपार थाना क्षेत्र के कुतुबपुर गांव में गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का विरोध सामने आया है। मंगलवार अपराह्न करीब 4 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण एडीएम कार्यालय पहुंचे और संयुक्त रूप से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहण की जद में उनकी उपजाऊ और पुश्तैनी जमीन आ रही है, जिसके चले जाने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों की ओर से सिद्धार्थ त्यागी ने प्रशासन के सामने उनकी मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि ग्रामवासियों ने अधिग्रहण को लेकर करीब 13 बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई है। ग्रामीणों की प्राथमिकता अपनी पुश्तैनी जमीन को बचाना है। हालांकि, उनका कहना है कि यदि अधिग्रहण के बदले इतना उचित मुआवजा दिया जाता है कि वे दूसरी जगह उतनी ही जमीन खरीद सकें, तो वे इस विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कुतुबपुर का मौजूदा सर्किल रेट जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। इसलिए मुआवजा तय करते समय केवल सर्किल रेट को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने आसपास के समान प्रकृति वाले गांवों में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई कृषि भूमि की रजिस्टर्ड बिक्री का तुलनात्मक अध्ययन कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने भूमि की सड़क से दूरी, संपर्क मार्ग, सिंचाई की सुविधा, आबादी और बाजार की निकटता तथा जमीन की भविष्य की उपयोगिता जैसे पहलुओं को भी मुआवजा निर्धारण में शामिल करने की मांग की। उनका कहना है कि सर्किल रेट को मुआवजे की अधिकतम सीमा नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा तय किया जाए।
ग्रामीणों ने बड़ी मात्रा में जमीन खोने वाले परिवारों के कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि कृषि भूमि ही उनके परिवारों की आय और भविष्य का प्रमुख आधार है। ऐसे में जमीन अधिग्रहित होने पर प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था भी जरूरी है।
सिद्धार्थ त्यागी ने आरोप लगाया कि प्रशासन अलग-अलग गांवों के ग्रामीणों को बुलाकर उन्हें गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कुतुबपुर के ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और अपनी पुश्तैनी जमीन तथा उचित मुआवजे के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
ग्रामीणों ने एडीएम कार्यालय में अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। अब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में प्रशासन ग्रामीणों की इन आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सभी की नजर है।

