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लोहिया ट्रस्ट से यूसीसी तक अखिलेश पर बरसे संजय निषाद, बोले अपने ही खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं तो दूसरों का क्या करेंगे

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लोहिया ट्रस्ट और समान नागरिक संहिता को लेकर निशाना साधा है। शिवपाल सिंह यादव की जगह अखिलेश यादव के लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने पर संजय निषाद ने सवाल उठाते हुए इसे अहंकार बताया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का अर्थ ही न्यास होता है और न्यास का मतलब भरोसा या विश्वास है। उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति को अपने ही खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं है तो वह दूसरों पर कैसे भरोसा करेगा।

अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी 14 सितंबर को सामने आई थी। इससे पहले वर्ष 2017 से शिवपाल सिंह यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट के सदस्यों की सहमति से अखिलेश यादव को यह जिम्मेदारी दी गई।

लोहिया ट्रस्ट की कमान बदली तो गरमाई सियासत

संजय निषाद ने कहा कि राजनीति भी भरोसे का ही एक रूप है। राजनीति में लोग नेता, पार्टी, अपने चुनाव क्षेत्र और अपने साथ जुड़े लोगों पर विश्वास करते हैं। ऐसे में उनके अनुसार यदि शीर्ष स्तर पर ही भरोसे की कमी दिखाई देती है और अपने ही खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं किया जाता तो दूसरों के साथ संबंधों को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को मिलने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हुई है। शिवपाल यादव लंबे समय से ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और अब अखिलेश यादव इसके अध्यक्ष बने हैं।

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यूसीसी के विरोध पर भी संजय निषाद ने साधा निशाना

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के मुद्दे पर भी संजय निषाद ने अखिलेश यादव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि संविधान सामाजिक न्याय की बात करता है और उनके अनुसार समान नागरिक संहिता तथा समान अधिकारों के जरिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

संजय निषाद ने महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि मुस्लिम महिलाएं भी देश की नागरिक हैं और उन्हें भी समान अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

हालांकि, यूसीसी को लेकर अखिलेश यादव का रुख अलग है। 15 सितंबर को उन्होंने केंद्र सरकार की यूसीसी संबंधी पहल पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बताया और कहा कि पहले चुनावी वादों को पूरा किया जाना चाहिए।

उत्तराखंड में लागू, दूसरे राज्यों में प्रक्रिया जारी

संजय निषाद ने कहा कि यूसीसी उत्तराखंड में लागू हो चुका है और उन्होंने असम तथा गुजरात का भी उल्लेख करते हुए इसे अन्य राज्यों में लागू किए जाने का समर्थन किया।

मौजूदा स्थिति के अनुसार उत्तराखंड जनवरी 2026 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना। वहीं असम और गुजरात में यूसीसी से संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित हो चुके हैं, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

यूसीसी का मुद्दा देश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रहा है। समर्थक इसे समान नागरिक अधिकारों से जोड़ते हैं, जबकि विरोध करने वाले दल और समूह इसके प्रावधानों तथा विभिन्न समुदायों पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

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14,429 प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट बनाने के फैसले का किया समर्थन

उत्तर प्रदेश में 14,429 प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के फैसले पर भी संजय निषाद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा की सुविधा केवल संपन्न परिवारों के बच्चों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले व्यक्ति को भी विकास का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार गरीब परिवार में पैदा होने वाले बच्चे को भी स्मार्ट क्लासरूम में पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

स्मार्ट क्लासरूम से गरीब बच्चों को जोड़ने पर जोर

संजय निषाद ने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी तकनीक आधारित शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि शिक्षा के क्षेत्र में संसाधनों की उपलब्धता को सामाजिक और आर्थिक स्थिति से अलग रखा जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़ा हुआ है। स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल संसाधन और तकनीक आधारित पढ़ाई को लेकर सरकार तथा विपक्ष के बीच शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर अलग अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।

संजय निषाद के ताजा बयानों से साफ है कि लोहिया ट्रस्ट में बदलाव, यूसीसी और सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

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