मुज़फ़्फ़रनगर। विभिन्न मांगों को लेकर पेंशनरों ने मंगलवार दोपहर करीब एक बजे कलेक्ट्रेट पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। भारत पेंशनर समाज और ऑल इंडिया पेंशनर्स एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रदर्शन के बाद अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। पेंशनरों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग में उन्हें शामिल करने, अंतरिम राहत देने और स्वास्थ्य बीमा की सीमा बढ़ाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष शिव कुमार यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेंशनरों को 8वें वेतन आयोग से बाहर रखना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद परिवार और स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। उनके अनुसार पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और इसे किसी तरह की भीख नहीं माना जा सकता।
शिव कुमार यादव ने कहा कि पेंशनरों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो पेंशनर संगठित होकर आंदोलन करेंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला ले सकते हैं।
वहीं वरिष्ठ सदस्य एवं अध्यक्ष राजपाल शर्मा ने कहा कि 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग से अलग करने की स्थिति में उनके सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो सकती है। उन्होंने मांग की कि पेंशनरों को 8वें वेतन आयोग का लाभ मिलने तक 25 से 50 प्रतिशत तक अंतरिम राहत दी जाए।
पेंशनरों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी अपनी मांग रखी। राजपाल शर्मा ने आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज की सीमा मौजूदा ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने की मांग की। उनका कहना था कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्च भी बढ़ते हैं, ऐसे में पेंशनरों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुरक्षा जरूरी है।
केंद्र सरकार ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी है। आयोग को वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े विषयों पर सिफारिशें देनी हैं। मार्च 2026 में आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनरों और संगठनों से सुझाव एवं ज्ञापन भी मांगे थे।
मुज़फ़्फ़रनगर में प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों ने कहा कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदर्शन के बाद पेंशनरों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग की।

