मेरठ। मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार को जिला जज की अदालत फैसला सुनाएगी। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 पेशियों और 22 गवाहों के बयान के बाद अब सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। अदालत पहले यह तय करेगी कि सौरभ की हत्या के मामले में आरोपी उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला दोषी हैं या नहीं। दोष सिद्ध होने की स्थिति में सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। मामले में अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग कर चुका है।
फैसले से पहले मृतक सौरभ राजपूत के भाई राहुल ने दोनों आरोपियों के लिए फांसी की मांग की है। राहुल ने कहा कि परिवार शुरू से इंसाफ की उम्मीद लगाए हुए है और उनकी मांग है कि जिन लोगों ने उनके भाई के साथ जो किया, उन्हें कम से कम फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
राहुल ने कहा कि परिवार करीब डेढ़ साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। उनका कहना है कि भाई की हत्या के बाद परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए उन्हें नियमित रूप से मेरठ कोर्ट जाना पड़ा। राहुल के मुताबिक वह खुद 11 दिन और उनकी मां नौ दिन अदालत में पेश हुईं। परिवार के अन्य सदस्य भी अलग-अलग मौकों पर अदालत पहुंचे।
मामले में कुल 22 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। इनमें सौरभ के भाई, उनकी मां और सौरभ के दोस्त के अलावा उन दुकानदारों की गवाही भी शामिल है, जहां से कथित तौर पर ड्रम, दवाइयां, चाकू, सीमेंट और रेत जैसी सामग्री खरीदे जाने से जुड़े साक्ष्य सामने आए। अभियोजन पक्ष ने हत्या से पहले और बाद की कथित तैयारियों को भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के तौर पर अदालत के सामने रखा।
अभियोजन पक्ष ने अंतिम बहस के दौरान दोनों आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की। अभियोजन के अनुसार हत्या से पहले नशीली दवा और चाकू की व्यवस्था की गई थी तथा बाद में शव को छिपाने के लिए नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की व्यवस्था की गई। बचाव पक्ष ने आरोपियों की ओर से अपना पक्ष अदालत में रखा और अभियोजन के दावों का विरोध किया। अंतिम बहस 17 सितंबर को पूरी हो चुकी है।
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था और नीले ड्रम में शव मिलने के बाद पूरे देश में चर्चा में रहा। अभियोजन के मुताबिक सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को टुकड़ों में कर सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में घटनास्थल, कथित तौर पर खरीदी गई सामग्री और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़े पक्ष रखे गए।
अदालत में लंबी सुनवाई के दौरान 126 पेशियां हुईं और 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जिला जज की अदालत में अब फैसला सुनाया जाना है। अदालत का निर्णय आरोपियों की दोषसिद्धि और उसके बाद सजा के संबंध में होगा।
परिवार की ओर से राहुल ने साफ कहा है कि यदि जिला अदालत के फैसले से परिवार संतुष्ट नहीं हुआ तो वे उच्च न्यायालय और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की लड़ाई जारी रखेंगे। अब बुधवार को आने वाले फैसले से इस बहुचर्चित मामले की अगली कानूनी दिशा तय होगी।

