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पूर्व दिशा में यात्रा से बचें, जानें अभिजीत मुहूर्त से लेकर राहुकाल तक का पूरा समय

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। किसी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश, पूजा-पाठ या अन्य महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखकर शुभ और अशुभ समय का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू काल गणना की वह पद्धति है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तिथि, नक्षत्र, योग, करण और अन्य महत्वपूर्ण समय की जानकारी प्राप्त की जाती है।

तीन अक्टूबर दो हजार छब्बीस को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह सात बजकर उनसठ मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शनिवार को सूर्योदय सुबह छह बजकर तेईस मिनट पर और सूर्यास्त शाम छह बजकर आठ मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात ग्यारह बजकर सैंतालीस मिनट पर तथा चंद्रास्त दोपहर एक बजे होगा।

पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और इसकी राशि कन्या मानी जाती है। वैदिक ज्योतिष में हस्त को तेरहवां नक्षत्र माना गया है। इसका अर्थ हाथ होता है। सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने की स्थिति को ज्योतिष में विशेष महत्व दिया जाता है और मान्यता है कि इसका प्रभाव सभी बारह राशियों पर पड़ता है।

दोपहर तक रहेगा वरीयान योग

शनिवार को वरीयान योग दोपहर तीन बजकर इक्कीस मिनट तक रहेगा। हिंदू पंचांग में वरीयान को सत्ताईस नित्य योगों में अठारहवां योग माना गया है। संस्कृत में वरीयान का अर्थ श्रेष्ठ, उत्तम, बड़ा या ऊंचा माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस योग के अधिपति धन के देवता कुबेर हैं, जबकि गुरु और शुक्र को इसके प्रमुख प्रेरक ग्रह माना जाता है।

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ज्योतिष शास्त्र में वरीयान योग को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार इस योग में जन्म लेने वाले जातकों में प्रभावशाली व्यक्तित्व, कर्मठता, बुद्धिमत्ता, कला के प्रति रुचि और धार्मिक प्रवृत्ति जैसे गुण हो सकते हैं।

सुबह 11:52 से 12:39 बजे तक अभिजीत मुहूर्त

तीन अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह ग्यारह बजकर बावन मिनट से दोपहर बारह बजकर उनतालीस मिनट तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में माना जाता है। सामान्य तौर पर अभिजीत मुहूर्त लगभग अड़तालीस मिनट का होता है, जिसकी गणना दिनमान के आधार पर की जाती है।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अभिजीत मुहूर्त में शुरू किए गए शुभ कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव कम माना जाता है। मान्यता है कि जब सूर्य आकाश में मध्य स्थिति के करीब होते हैं, उस समय अभिजीत मुहूर्त बनता है। महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत के लिए इस समय को शुभ माना जाता है।

अमृतकाल भी रहेगा

शनिवार को अमृतकाल का समय शाम चार बजकर पांच मिनट बताया गया है। पंचांग और ज्योतिष की मान्यताओं में अमृतकाल को शुभ और सकारात्मक समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, महत्वपूर्ण कार्यों, व्यापारिक गतिविधियों, निवेश और अन्य शुभ कार्यों को करने की मान्यता है।

सुबह 9:19 से 10:47 बजे तक राहुकाल

तीन अक्टूबर को राहुकाल सुबह नौ बजकर उन्नीस मिनट से दस बजकर सैंतालीस मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। राहुकाल की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ भागों में विभाजित करके की जाती है। इसका समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

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मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए काम की शुरुआत से बचना चाहिए। हालांकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखने में कोई बाधा नहीं मानी जाती।

सुबह 6:23 से 7:51 बजे तक गुलिक काल

शनिवार को गुलिक काल सुबह छह बजकर तेईस मिनट से सात बजकर इक्यावन मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।

हालांकि कुछ मान्यताओं के अनुसार नियमित रूप से किए जाने वाले कार्य इस अवधि में किए जा सकते हैं। बैंक में धन जमा करना, दान देना अथवा निवेश जैसे कार्यों को लेकर भी अलग-अलग ज्योतिषीय परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं।

दोपहर 1:44 से 3:12 बजे तक यमगंड

यमगंड काल दोपहर एक बजकर चवालीस मिनट से तीन बजकर बारह मिनट तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता में यमगंड को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ समय माना जाता है। इसे मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित काल माना गया है।

इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करने अथवा यात्रा पर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है। धन संबंधी महत्वपूर्ण लेनदेन को भी इस समय टालने की मान्यता है।

सूर्य कन्या राशि में रहेंगे

तीन अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में रहने के दौरान व्यावहारिकता, योजना और कार्यों को व्यवस्थित तरीके से करने पर जोर रहता है। सूर्य की स्थिति को व्यक्ति के कार्यक्षेत्र, आत्मविश्वास और बौद्धिक क्षमता से जोड़कर देखा जाता है।

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मिथुन राशि में रहेगा चंद्रमा

इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक और मिथुन राशि का स्वामी बुध को माना जाता है। इसलिए मिथुन राशि में चंद्रमा के गोचर को मन और बुद्धि के बीच विशेष संबंध वाली स्थिति के रूप में देखा जाता है।

मिथुन वायु तत्व की राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा के मिथुन में रहने के दौरान विचारों की अधिकता, मानसिक चंचलता और असमंजस जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं।

पूर्व दिशा में दिशाशूल

शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। इसके साथ ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को भी दिशाशूल से प्रभावित माना गया है। ज्योतिष और वास्तु संबंधी मान्यताओं में दिशाशूल का अर्थ ऐसी दिशा से है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना अनुकूल नहीं माना जाता।

इसलिए मान्यता के अनुसार शनिवार को पूर्व दिशा तथा ईशान कोण की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। हालांकि वास्तविक यात्रा और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े निर्णय परिस्थितियों के अनुसार लिए जाते हैं।

कुल मिलाकर तीन अक्टूबर का पंचांग तिथि, नक्षत्र, योग और विभिन्न शुभ-अशुभ काल के लिहाज से महत्वपूर्ण है। शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह ग्यारह बजकर बावन मिनट से दोपहर बारह बजकर उनतालीस मिनट तक रहेगा, जबकि राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड के दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचने की ज्योतिषीय मान्यता है।

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