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बाल विवाह के खात्मे के लिए ग्राम सभाओं ने लिया संकल्प, ग्रामीण समाज विकास केन्द्र ने किया स्वागत

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गांधी जयंती पर 2.42 लाख से अधिक विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त गांव बनाने का प्रस्ताव; संगठन ने सरकार और जिला प्रशासन की पहल को बताया अहम

मुजफ्फरनगर। बाल विवाह के उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे ग्रामीण समाज विकास केन्द्र, मेरठ ने केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की पहल का स्वागत किया है। गांधी जयंती के अवसर पर देशभर में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह के खात्मे का संकल्प लिया गया। संगठन ने कहा कि गांव स्तर पर लिए जा रहे ऐसे संकल्प बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारत सरकार की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए गए थे कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन कर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ का संकल्प लिया जाए। इसी क्रम में 2.42 लाख से अधिक विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इन ग्राम सभाओं में गांवों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव रखने के साथ इसके खात्मे का संकल्प लिया गया। कार्यक्रमों में स्थानीय ग्रामीणों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों और अधिकारियों ने भाग लिया।

“गांव और समाज एकजुट होगा तो बाल विवाह के खिलाफ बदलाव तेजी से आएगा”

ग्रामीण समाज विकास केन्द्र के सचिव मेहर चंद ने कहा कि भारत सरकार, विशेष रूप से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय की ओर से देशभर की ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह के खात्मे के लिए शुरू की गई मुहिम स्वागत योग्य है। जिला प्रशासन और जिलाधिकारी की ओर से इस दिशा में किए जा रहे प्रयास भी सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन की इस पहल से 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।

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मेहर चंद ने कहा कि जब पूरा गांव और समाज एकजुट होकर बाल विवाह के खिलाफ खड़ा होगा, तब बदलाव तेजी से आएगा। इससे हर बेटी को अपना बचपन जीने और अपने सपने पूरे करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता के साथ समाज की सामूहिक भागीदारी भी जरूरी है।

ग्रामीण समाज विकास केन्द्र ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन की यह पहल बाल विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूती प्रदान करेगी। संगठन ने सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पहले से अधिक सक्रियता के साथ काम करने की बात कही।

संगठन के अनुसार, ग्रामीण समाज विकास केन्द्र, मेरठ ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ यानी जेआरसी का सहयोगी संगठन है। जेआरसी बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क है। संगठन के अनुसार, जेआरसी अपने 300 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ देश के 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ सरकार और प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहा है।

जेआरसी ने अपने सहयोगी नागरिक समाज संगठनों की भागीदारी से बाल विवाह के खिलाफ देशव्यापी जमीनी अभियान शुरू किया है। संगठन का उद्देश्य एक पीढ़ी के भीतर बाल विवाह की कुप्रथा को समाप्त करने के लिए समुदायों को जागरूक और सक्रिय करना है। वर्ष 2024 में भारत सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान से इस मुहिम को और व्यापकता मिली।

गांधी जयंती पर आयोजित ग्राम सभाओं में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों और अधिकारियों की भागीदारी के जरिए बाल विवाह मुक्त गांव बनाने का संदेश दिया गया। संगठन का कहना है कि सामूहिक भागीदारी से अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और बाल विवाह के खिलाफ सामाजिक माहौल मजबूत होगा।

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