मुज़फ़्फ़रनगर। मुज़फ़्फ़रनगर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय परिसर में धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। संविदाकर्मियों ने 12 अक्टूबर को लखनऊ कूच कर प्रदेशभर के कर्मचारियों के साथ प्रदर्शन करने की तैयारी की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो अस्पतालों की आपातकालीन सेवाओं समेत अन्य कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। ये धरना सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलता रहा।
धरने को समर्थन देने पहुंचे राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री कुलदीप शर्मा ने कहा कि सरकार ने करीब 10 साल पहले लिखित समझौते के जरिए कर्मचारियों की मांगें मानने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि संविदाकर्मियों को करीब 10 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, जबकि उनकी मांग न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये करने की है।
डॉ. सुधा गुप्ता ने कहा कि समान काम करने के बावजूद संविदा और नियमित कर्मचारियों के वेतन व सुविधाओं में बड़ा अंतर है। उनके मुताबिक, यह अंतर डेढ़ गुने से भी अधिक है। उन्होंने कर्मचारियों को ईपीएफ, एचआरए, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई।
संगठन ने कहा कि इन मांगों पर ठोस निर्णय होने तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। 12 अक्टूबर को लखनऊ में होने वाले प्रदर्शन में प्रदेशभर के संविदाकर्मियों के शामिल होने की तैयारी है। कर्मचारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
संविदाकर्मियों ने आपातकालीन सेवाओं और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की चेतावनी देते हुए इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर डालने की बात कही है। ऐसे में मांगों को लेकर जारी गतिरोध के बीच स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

