मुंबई। भारत के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ की तैयारी के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपनी अगली विकास रणनीति का रोडमैप सामने रखा है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने मोबिलिटी, होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज-इंटरनेशनल कारोबार को भविष्य की ग्रोथ के तीन प्रमुख इंजन बताया। कंपनी का लक्ष्य अपनी तकनीकी क्षमताओं, डिजिटल नेटवर्क और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर नए बाजारों में विस्तार करना और भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका मजबूत करना है।

मुंबई में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान आकाश अंबानी ने कहा कि कंपनी की कारोबारी रणनीति के केंद्र में ग्राहक हैं। उन्होंने कहा कि जियो का उद्देश्य हर भारतीय, हर घर और हर एंटरप्राइज तक बेहतर और किफायती डिजिटल सेवाएं पहुंचाना है। कंपनी के मुताबिक, उसके पास फिलहाल करीब 53.3 करोड़ कनेक्टिविटी ग्राहक हैं और वह भारत के 60 प्रतिशत से अधिक डेटा ट्रैफिक को संभालती है।
मोबिलिटी कारोबार में 34 करोड़ नए ग्राहकों की संभावना
जियो अपने मोबाइल कारोबार को आने वाले वर्षों में विस्तार का बड़ा आधार मान रहा है। कंपनी के अनुमान के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में भारतीय बाजार में करीब 34 करोड़ नए 4G और 5G ग्राहकों की संभावना है। इसमें लगभग 10 करोड़ ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं, जो पहली बार मोबाइल कनेक्शन लेंगे। वहीं, करीब 24 करोड़ ग्राहक 2G नेटवर्क से 4G और 5G सेवाओं की ओर बढ़ सकते हैं।
आकाश अंबानी के अनुसार, जियो नए ग्राहकों को जोड़ने के साथ मौजूदा उपभोक्ताओं को बेहतर कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रहा है। कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसके नेट एक्टिव मोबाइल ग्राहकों की वृद्धि दूसरे सबसे बड़े ऑपरेटर की तुलना में करीब तीन गुना रही।
कंपनी की रणनीति में 4G और 5G नेटवर्क का विस्तार, बेहतर डिजिटल अनुभव और किफायती सेवाएं प्रमुख हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी के बढ़ते इस्तेमाल से डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
होम ब्रॉडबैंड: 2.86 करोड़ से 10 करोड़ घरों तक पहुंचने का लक्ष्य
जियो ने होम ब्रॉडबैंड को अपना दूसरा प्रमुख ग्रोथ इंजन बताया है। कंपनी के पास वर्तमान में करीब 2.86 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं और वह इस आधार को बढ़ाकर 10 करोड़ घरों तक पहुंचाना चाहती है।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश में जुड़े कुल नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में जियो की हिस्सेदारी करीब 67.5 प्रतिशत रही। कंपनी फाइबर नेटवर्क के साथ वायरलेस तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। आकाश अंबानी ने बताया कि जियो की पहुंच देश के करीब 19,000 पिन कोड तक बढ़ाई जा रही है।
घर से काम करने, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल मनोरंजन और स्मार्ट होम सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हाई-स्पीड इंटरनेट की मांग में वृद्धि हो रही है। ऐसे में जियो ब्रॉडबैंड कारोबार के विस्तार को अपनी दीर्घकालिक विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। कंपनी का लक्ष्य अधिक से अधिक घरों तक विश्वसनीय इंटरनेट सेवाएं पहुंचाना है।
एंटरप्राइज और इंटरनेशनल कारोबार पर बड़ा दांव
जियो का तीसरा ग्रोथ इंजन एंटरप्राइज डिजिटल सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय कारोबार होगा। कंपनी के अनुमान के मुताबिक, भारत में एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज का बाजार करीब 5.1 लाख करोड़ रुपये यानी 56.8 अरब डॉलर का है। इस क्षेत्र में कंपनियों, बैंकों और अन्य संस्थानों को नेटवर्क, क्लाउड, कनेक्टिविटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने की बड़ी संभावनाएं हैं।
आकाश अंबानी ने बताया कि देश की लगभग 65 प्रतिशत बैंक शाखाएं जियो नेटवर्क से जुड़ी हैं। कंपनी अपनी मौजूदा नेटवर्क क्षमता और तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए कारोबार बढ़ाना चाहती है।
इस रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार है। जियो अपनी विकसित एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक को चुनिंदा विदेशी बाजारों में उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। कंपनी की योजना केवल सॉफ्टवेयर बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों के साथ मैनेज्ड सर्विस पार्टनर के रूप में काम करने की भी है।
आकाश अंबानी के मुताबिक, भारतीय तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने से भारत को टेक्नोलॉजी आयातक से टेक्नोलॉजी निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। इससे जियो के लिए घरेलू बाजार के बाहर भी कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं खुल सकती हैं।
लंबी अवधि की सोच और वित्तीय अनुशासन पर जोर
कार्यक्रम में ईशा अंबानी ने जियो की शुरुआत और रिलायंस की कारोबारी सोच का उल्लेख करते हुए कहा कि कंपनी लंबे समय की योजना, बड़े पैमाने पर कारोबार खड़ा करने, मजबूत क्रियान्वयन और वित्तीय अनुशासन पर भरोसा करती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत उदय कोटक ने रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी और वर्ष 1977 में रिलायंस के आईपीओ को याद करते हुए की। इस संदर्भ में कंपनी की विकास यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।
जियो प्लेटफॉर्म्स की घोषित रणनीति से स्पष्ट है कि कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी के अपने मौजूदा आधार को मजबूत करने के साथ होम ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज डिजिटल सेवाओं में विस्तार करना चाहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी तकनीक और सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना भी इसी रणनीति का हिस्सा है।
भारत के संभावित सबसे बड़े आईपीओ से पहले कंपनी की यह विकास योजना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन और कारोबार के विस्तार का वास्तविक प्रभाव बाजार की परिस्थितियों, प्रतिस्पर्धा और योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

