भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग, 100 से अधिक राशन विक्रेताओं ने सामूहिक इस्तीफे की दी चेतावनी
मुजफ्फरनगर। जनपद में पूर्ति विभाग के एक अधिकारी की तैनाती को लेकर विवाद सामने आया है। तहसील खतौली क्षेत्र में नवनियुक्त पूर्ति निरीक्षक आशीष श्रीवास्तव को तहसील सदर क्षेत्र में तैनात नहीं किए जाने की मांग को लेकर उचित दर विक्रेताओं ने जिला पूर्ति अधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने अधिकारी पर भ्रष्टाचार और राशन वितरण से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके विरुद्ध जिला और मंडल स्तर पर जांच लंबित है। ऐसे में उन्हें तहसील सदर क्षेत्र में तैनात किया जाना जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
शिकायत पत्र में उचित दर विक्रेताओं ने आरोप लगाया है कि आशीष श्रीवास्तव की पूर्व में तहसील सदर और नगर क्षेत्र स्थित एरिया ऑफिस में तैनाती के दौरान राशन विक्रेताओं को परेशान किया जाता था। आरोप है कि दुकानों की जांच के नाम पर विक्रेताओं पर दबाव बनाया जाता था और उनसे कथित तौर पर हर महीने तीन से चार हजार रुपये की मांग की जाती थी। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कराने और दुकान निरस्त कराने की धमकी देकर कथित रूप से 50 हजार से एक लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष शिकायत पत्र में उपलब्ध नहीं है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अधिकारी के विरुद्ध पहले भी जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि कुछ उचित दर विक्रेताओं ने सक्षम अधिकारियों के समक्ष शपथ पत्र सहित अपने बयान भी दर्ज कराए हैं। शिकायत पत्र के मुताबिक, इन मामलों की जांच सहारनपुर मंडल के संयुक्त आयुक्त खाद्य के समक्ष चल रही है।
शिकायत में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। विक्रेताओं का कहना है कि संबंधित खाद्यान्न की आपूर्ति में कथित रूप से एक या दो बोरी कम लेने के लिए दबाव बनाया जाता था और ऐसा नहीं करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी। शिकायतकर्ताओं ने इस संबंध में भी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
पहले भी बदले गए थे तैनाती स्थल
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में सामने आई शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के अनुमोदन से आशीष श्रीवास्तव का स्थानांतरण तहसील सदर से खतौली क्षेत्र में किया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ताओं के अनुसार उनका स्थानांतरण नगर क्षेत्र और एरिया ऑफिस में हो गया। वहां तैनाती के दौरान भी उचित दर विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों को शिकायतें भेजीं। प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि इसके बाद उन्हें नगर क्षेत्र और एरिया ऑफिस से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया था।
खतौला गांव में राशन वितरण का मामला भी उठाया
शिकायतकर्ताओं ने ग्राम खतौला में राशन वितरण से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया है। प्रार्थना पत्र के अनुसार, जनवरी 2025 में पूर्व उचित दर विक्रेता तनु, पत्नी अनिल कुमार, के विरुद्ध राशन वितरण में अनियमितता की शिकायत मिलने पर जांच की गई थी। शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि जांच के दौरान गांव के लगभग 200 राशन कार्डधारकों के बयान लिए गए थे, जिनमें से करीब 190 कार्डधारकों ने दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में राशन नहीं मिलने की शिकायत की थी।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस मामले में कार्रवाई और दुकान के संचालन से संबंधित निर्णयों को लेकर भी सवाल उठे। प्रार्थना पत्र के अनुसार, चार फरवरी 2025 को पूर्व विक्रेता तनु की दुकान को ग्राम कुटबी की उचित दर विक्रेता कमलेश देवी की दुकान से संबद्ध किया गया था। इसके बाद पांच फरवरी को दुकान सील किए जाने और छह फरवरी को सील हटाए जाने का उल्लेख किया गया है।
प्रार्थना पत्र में छह फरवरी 2025 की हस्तांतरण रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि दुकान में गेहूं का स्टॉक छह क्विंटल 19 किलोग्राम और चावल का स्टॉक नौ क्विंटल चार किलोग्राम दर्ज था। दोनों को मिलाकर कुल खाद्यान्न 15 क्विंटल 23 किलोग्राम बताया गया है।
खाद्यान्न आवंटन की जानकारी नहीं मिलने का आरोप
शिकायत पत्र में उचित दर विक्रेता कमलेश देवी की ओर से फरवरी 2025 में ग्राम खतौला में राशन वितरण के लिए आवंटित खाद्यान्न की जानकारी और स्टॉक हस्तांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, संबंधित विक्रेता ने खाद्यान्न का नियमानुसार हस्तांतरण कराने के लिए कई बार आवेदन दिए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद गेहूं और चावल के आवंटन की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन दिया गया था, लेकिन मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस मामले में संयुक्त आयुक्त खाद्य, सहारनपुर मंडल के समक्ष अपील लंबित होने का भी उल्लेख किया गया है।
निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की जताई आशंका
उचित दर विक्रेताओं ने अपने प्रार्थना पत्र में आशंका जताई है कि यदि आशीष श्रीवास्तव को दोबारा तहसील सदर क्षेत्र में तैनात किया जाता है, तो उनके विरुद्ध चल रही जांच प्रभावित हो सकती है। शिकायतकर्ताओं ने मूल दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है। इसी आधार पर उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक अधिकारी को तहसील सदर क्षेत्र में तैनात न किया जाए।
शिकायत पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि अधिकारी को तहसील सदर क्षेत्र में तैनात किया गया, तो सदर तहसील और अन्य क्षेत्रों के 100 से अधिक उचित दर विक्रेता सामूहिक इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
उचित दर विक्रेताओं ने जिला पूर्ति अधिकारी से पूरे मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करने और लंबित शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी की तैनाती ऐसी जगह की जानी चाहिए, जहां जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका न रहे।
फिलहाल, उपलब्ध शिकायत पत्र में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पूर्ति निरीक्षक का पक्ष शामिल नहीं है। आरोपों की वास्तविकता और उन पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

