नई दिल्ली। भारत में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रूसी संघ की संसद (स्टेट ड्यूमा) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन नई दिल्ली पहुंच गए हैं। भारत की मेजबानी में यह मंच 26 और 27 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित किया जाएगा। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय नेता हिस्सा लेंगे।
मंच का मुख्य उद्देश्य जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देने और विभिन्न देशों की संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना है। इस दौरान चर्चा होगी कि संसदें आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने और विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
ओम बिरला ने बताया संसदीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण आयोजन
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस सप्ताह संसद भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के आयोजन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यह कार्यक्रम भारत की संसदीय कूटनीति के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।
ओम बिरला के अनुसार, इस मंच में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों की संसदों के अध्यक्ष, संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के अध्यक्ष, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।
द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों पर भी रहेगा जोर
ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं और संसदीय मैत्री समूहों के साथ द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच संसदीय संवाद और आपसी सहयोग को आगे बढ़ाना होगा।
कार्यक्रम से पहले 25 अक्टूबर को विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के संयुक्त बयान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर काम होगा।
18 देशों से मिले सुझाव, 64 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि मंच की चर्चा के लिए अब तक 18 देशों से सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन्हीं सुझावों के आधार पर विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने भारत की ओर से संसदीय कूटनीति को विस्तार देने के लिए शुरू की गई पहल का भी उल्लेख किया। बिरला के मुताबिक, भारत ने 64 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए हैं। उन्होंने इसे व्यापक स्तर पर किया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। साथ ही कहा कि जिन देशों के साथ पहले से संसदीय मैत्री मंच मौजूद हैं, वहां भी इन समूहों के विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है।
‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना’ होगा मुख्य विषय
12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का केंद्रीय विषय ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना’ रखा गया है। इस विषय के तहत संसदों की भूमिका, जनहित से जुड़े मुद्दों और विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों पर चर्चा होगी।
भारत की अध्यक्षता में होने वाला यह आयोजन ब्रिक्स देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को विचारों के आदान-प्रदान का अवसर देगा। इसके माध्यम से संसदीय सहयोग को मजबूत करने और जन-केंद्रित विकास के लिए साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

