मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए कथित हमले के पीछे वसूली, गैंग का वर्चस्व स्थापित करने और लोगों में दहशत फैलाने की मंशा सामने आई है। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के हवाले से पुलिस ने दावा किया है कि इस वारदात में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरोपी शामिल थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने आर्थिक लाभ हासिल करने और अपने गिरोह का दबदबा कायम करने के उद्देश्य से अभिनेता को निशाना बनाया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर एक संगठित अपराध गिरोह के सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर रहे थे। वारदात को पूर्व नियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया और इसमें अवैध व घातक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए साजिश रचे जाने की बात भी सामने आई है।
18 अक्टूबर को कार पर की गई थी फायरिंग
पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर की शाम मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर उस समय कई राउंड गोलियां चलाई गईं, जब उनकी गाड़ी एक फुटबॉल ग्राउंड परिसर से बाहर निकल रही थी। हमले के दौरान अभिनेता बाल-बाल बच गए। उन्हें गोली नहीं लगी, हालांकि कांच के टुकड़ों से उनके हाथ और छाती पर हल्की चोटें आईं। गोलीबारी में उनका ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए थे।
11 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
मुंबई पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से आठ सीधे तौर पर मुख्य आरोपी अनिल पंडित के संपर्क में थे। अनिल पंडित अभी फरार बताया जा रहा है।
पुलिस की कार्रवाई के दौरान सबसे पहले राजस्थान के कोटा से तीन कथित शूटरों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दिल्ली स्पेशल सेल ने राजधानी क्षेत्र से कुणाल, सुमित, राधा और बबिता को गिरफ्तार किया।
वहीं, मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल ने हरियाणा के सोनीपत से तीन अन्य आरोपियों को पकड़ा। मामले में 11वें आरोपी के रूप में प्रांजल ठाकुर को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया गया।
वसूली और गैंग का दबदबा जांच के केंद्र में
क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, हमले के पीछे कथित तौर पर पैसों की वसूली, गिरोह का वर्चस्व स्थापित करने और समाज में भय पैदा करने का उद्देश्य था। पुलिस मामले में आरोपियों की भूमिका, साजिश के नेटवर्क और फरार मुख्य आरोपी की तलाश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

