नई दिल्ली। दीपावली से पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व धन, समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस त्योहार पर लोग सोना, चांदी, बर्तन, वाहन और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी चीज भी है, जिसे खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। यह है झाड़ू। देखने में सामान्य लगने वाली झाड़ू का धनतेरस पर विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता रहती है, वहां मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। झाड़ू घर की गंदगी और कचरे को बाहर करती है। इसी वजह से इसे दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक माना गया है। धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदकर घर लाने की परंपरा इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी है।
नई झाड़ू खरीदने से आती है सुख-समृद्धि की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि झाड़ू घर से गंदगी के साथ-साथ दरिद्रता को भी बाहर करती है। यही वजह है कि आर्थिक परेशानियों और कर्ज की समस्या से जूझ रहे लोग भी इस दिन झाड़ू खरीदकर पूजा-अर्चना करते हैं। कई घरों में नई झाड़ू में सफेद धागा बांधने की परंपरा भी प्रचलित है।
कहां रखनी चाहिए झाड़ू?
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां बाहरी लोगों की नजर आसानी से न पड़े। इसे खुले स्थान या मुख्य दरवाजे के सामने रखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि झाड़ू को नजरों से दूर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और आर्थिक परेशानियां दूर रहती हैं।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण और उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण को शुभ माना जाता है। वहीं, इसे उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण, पूजा स्थल या रसोई के पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
झाड़ू खरीदने और रखने से जुड़ी परंपराएं
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में धनतेरस पर झाड़ू सम संख्या में खरीदना शुभ बताया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इससे जुड़ी परंपराएं अलग हो सकती हैं। कई लोग एक झाड़ू तो कई लोग जोड़ी में झाड़ू खरीदते हैं।
धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा का मूल संदेश घर में स्वच्छता, सकारात्मकता और समृद्धि बनाए रखने से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, साफ-सुथरे घर में ही सुख-शांति और मां लक्ष्मी का वास होता है।

