मुजफ्फरनगर। जनपद में बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बुधवार को चरथावल कस्बे में श्रम विभाग और विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संस्थाओं की संयुक्त टीम ने सघन निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान अलग-अलग प्रतिष्ठानों से 8 बाल श्रमिकों को चिन्हित कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई करते हुए बाल श्रम से मुक्त कराया गया।
यह अभियान जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार राय के आदेशानुसार तथा सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह और पुलिस अधीक्षक (अपराध) इंदु सिद्धार्थ के निर्देशन में चलाया गया।
बाजार और विभिन्न प्रतिष्ठानों पर की गई जांच
अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी बालेश्वर सिंह और शालू राणा, थाना मानव तस्करी विरोधी इकाई, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा सहयोगी संस्थाओं जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन और ग्रामीण समाज विकास केंद्र की संयुक्त टीम शामिल रही।
टीम ने चरथावल कस्बे के मुख्य बाजार, रोहाना रोड, कोटेश्वर रोड, थाना भवन रोड, शिव चौक और खोली चौक क्षेत्र में निरीक्षण किया। इस दौरान मिष्ठान भंडार, रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे, कार वॉशिंग सेंटर, फर्नीचर की दुकानों और निजी अस्पतालों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान 8 बाल श्रमिकों को चिन्हित कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया गया।
18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम न कराने की अपील
सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने सभी सेवायोजकों से अपील की कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम न कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का प्रथम अधिकार शिक्षा है और बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय उनकी पढ़ाई एवं सुरक्षित भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनपद में बाल श्रम के विरुद्ध यह अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के साथ सहयोग कर रही संस्थाएं
ग्रामीण समाज विकास केंद्र के सचिव मेहर चंद ने कहा कि उनकी संस्था बच्चों के सुरक्षित बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रशासन के साथ निरंतर सहयोग कर रही है।
अभियान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वॉलंटियर गौरव मलिक, सब-इंस्पेक्टर जगत सिंह और कांस्टेबल जयप्रकाश का विशेष सहयोग रहा। संयुक्त टीम ने बाल श्रम उन्मूलन के लिए जागरूकता और निरीक्षण अभियान को आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
