मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में प्रशासनिक अधिकारियों की तमाम कोशिशों के बावजूद कलेक्ट्रेट परिसर में चल रहा ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भोपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेहड़ा थ्रू के सैकड़ों ग्रामीण पिछले दो दिनों से अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में डटे हुए हैं। ग्रामीणों का सीधा और गंभीर आरोप है कि गांव के ऐतिहासिक रविदास मंदिर की जमीन पर वर्तमान ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर जबरन ग्राम सचिवालय का निर्माण करवा दिया है और मंदिर की पावन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक इस सचिवालय को मंदिर की जमीन से पूरी तरह स्थानांतरित नहीं किया जाएगा, तब तक वे कलेक्ट्रेट परिसर से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।
देर रात कलेक्ट्रेट पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट, ग्रामीणों को समझाने की कोशिशें रहीं नाकाम
मामले की संवेदनशीलता और कड़ाके की ठंड व रात के समय बुजुर्गों-महिलाओं की मौजूदगी को देखते हुए बीती देर रात सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ खुद धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने जमीन पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को बेहद ध्यान से सुना और उसके जल्द से जल्द निवारण का पूरा भरोसा दिलाया। सिटी मजिस्ट्रेट ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपना धरना समाप्त कर तुरंत अपने घरों को लौट जाएं। हालांकि, सिटी मजिस्ट्रेट के इस सकारात्मक रवैये और आश्वासन से ग्रामीण कुछ हद तक संतुष्ट जरूर नजर आए, लेकिन उन्होंने रात के समय धरना स्थल खाली करने से साफ इंकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे इस विषय पर आपस में गहन मशवरा करने के बाद ही प्रशासनिक अधिकारियों को अपना अंतिम फैसला सुनाएंगे।
प्रशासन को चाहिए तीन महीने का समय, डीपीआरओ ने तैयार किया नया प्लान
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ ने कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मीडियाकर्मियों से भी विस्तार से बातचीत की। उन्होंने बताया कि बेहड़ा थ्रू गांव के लोग पिछले दो दिनों से कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे हैं और उनकी मांगें पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ी हुई हैं। सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि इस कानूनी और व्यावहारिक समस्या के स्थाई समाधान में कम से कम दो से तीन महीने का समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने जानकारी दी कि इस गंभीर विषय को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) से भी उच्च स्तरीय वार्ता की जा चुकी है। डीपीआरओ ने आश्वस्त किया है कि गांव के लिए एक नए ग्राम सचिवालय का निर्माण कराया जाएगा और जैसे ही नया भवन तैयार होगा, मंदिर परिसर से वर्तमान कार्यालय को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि, देर रात तक चली इस लंबी वार्ता के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कोई ठोस और सर्वमान्य समाधान नहीं निकल सका।
प्रेमदास महाराज ने खोला मोर्चा: धार्मिक आयोजनों में आ रही बाधा, टावर लगाने का भी विरोध
दूसरी तरफ, ग्रामीणों की इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे संत प्रेमदास महाराज ने भी मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने बेहद दुखी मन से बताया कि बेहड़ा थ्रू के रविदास मंदिर की जमीन पर प्रशासन और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से जबरदस्ती ग्राम सचिवालय बनाकर कब्जा जमाया गया है, जबकि यह जमीन पूरे गांव के शोषित और वंचित समाज की धरोहर है। महाराज ने कहा कि समाज के सभी छोटे-बड़े धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम इसी मंदिर परिसर में आयोजित होते हैं, लेकिन सचिवालय बनने के बाद से यहां भारी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने एक नया खुलासा करते हुए बताया कि अब प्रशासन मंदिर परिसर के भीतर ही मोबाइल टावर लगवाने की फिराक में है, जिसने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, आज हो सकता है बड़ा फैसला
संत प्रेमदास महाराज ने सिटी मजिस्ट्रेट के साथ हुई देर रात की वार्ता का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकारी महोदय ने हमें तीन महीने के भीतर नया ग्राम सचिवालय बनाकर तैयार करने का मौखिक आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण प्रशासन की मजबूरी को समझते हैं, लेकिन मौखिक बातों पर अब भरोसा करना मुश्किल है। यदि जिला प्रशासन का कोई जिम्मेदार बड़ा अधिकारी उन्हें इस बात का लिखित में आश्वासन पत्र सौंपता है, तभी सभी ग्रामीण और प्रदर्शनकारी मिलकर कलेक्ट्रेट से धरना समाप्त करने और गांव वापस लौटने पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेंगे। फिलहाल, लिखित पत्र की मांग को लेकर ग्रामीण तीसरे दिन भी कलेक्ट्रेट में डटे हुए हैं और आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।



