लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद जोनल कार्यालय ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की कई टीमों ने एक साथ राजधानी लखनऊ और बुंदेलखंड के झांसी जिले में ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई समाजवादी पार्टी (सपा) के एक कद्दावर पूर्व विधायक के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच के सिलसिले में की गई है। इस अचानक हुई छापेमारी से बेनामी संपत्तियों के साम्राज्य में निवेश करने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
यूपी विजिलेंस की एफआईआर बनी आधार, मनी लॉन्ड्रिंग का खुला बड़ा नेटवर्क
जांच एजेंसी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि ईडी की यह बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक के खिलाफ दर्ज की गई मूल एफआईआर के आधार पर शुरू हुई है। विजिलेंस ने अपनी जांच में पूर्व विधायक पर अपने कार्यकाल के दौरान पद का दुरुपयोग कर आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक अचल संपत्ति अर्जित करने के पुख्ता आरोप लगाए थे। इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने अपनी प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की और मनी लॉन्ड्रिंग (अवैध धन को वैध बनाने) के कोण से जांच को आगे बढ़ाया। शुरुआती तफ्तीश में ही यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि कथित अपराध और भ्रष्टाचार से कमाए गए काले धन को सफेद करने के लिए बाकायदा एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया था।
शेल कंपनियों और रियल एस्टेट में खपाया गया काला धन, तेईस से अधिक एफआईआर दर्ज
ईडी की वित्तीय जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि भ्रष्टाचार की इस काली कमाई को रियल एस्टेट, बड़े निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और अन्य विभिन्न व्यवसायों से जुड़ी कई फर्जी कंपनियों व लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) के जाल के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया था। जांच एजेंसी को पुख्ता अंदेशा है कि इन तमाम व्यावसायिक संस्थाओं का गठन केवल और केवल अवैध धन को वैध दिखाने के लिए ही किया गया था। इसके अलावा यह भी पता चला है कि इस पूरे सिंडिकेट और पूर्व विधायक के खिलाफ अलग-अलग थानों व विभागों में तेईस से अधिक एफआईआर पहले से ही दर्ज हैं, जिन्हें अब ईडी ने अपनी कार्रवाई का मुख्य आधार बना लिया है।
छापेमारी में डिजिटल सबूत और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त, बड़े खुलासे की उम्मीद
बुधवार को दिनभर चली इस मैराथन तलाशी के दौरान ईडी की एक्सपर्ट टीमों ने दोनों शहरों से कई अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। इसके साथ ही कई आधुनिक डिजिटल उपकरण जैसे लैपटॉप, हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जिनमें वित्तीय हेरफेर के गुप्त कोड मौजूद होने की संभावना है। पूर्व विधायक और उनके करीबियों के नाम पर दर्ज करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्तियों के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड भी सील कर दिए गए हैं। केंद्रीय एजेंसी का मुख्य उद्देश्य अपराध की इस कमाई के अंतिम छोर तक पहुंचना और इस काले धन को छिपाने या ठिकाने लगाने वाले मास्टरमाइंड की पहचान करना है। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई अन्य रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं और बड़ी गिरफ्तारियां भी संभव हैं।



