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अयोध्या राम मंदिर न्यूज़: 200 किलो चांदी के विवाद पर ट्रस्ट का बड़ा खुलासा, दानदाताओं से मांगी पैन-मोबाइल लिस्ट

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अयोध्या के भव्य और दिव्य राम मंदिर के निर्माण के साथ ही वहां आने वाले चढ़ावे और दान को लेकर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं में भारी उत्सुकता रहती है। लेकिन बीते कुछ दिनों से रामलला के दरबार में अर्पित की गई २०० किलो चांदी को लेकर सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक तरह-तरह की चर्चाएं तैर रही थीं। अब इस पूरे विवाद और संशय के बादलों को छांटते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आर-पार का जवाब दे दिया है। ट्रस्ट ने न केवल इन ईंटों का पूरा सच सामने रखा है, बल्कि पुख्ता सबूत के तौर पर तस्वीरें और बही-खाते के रिकॉर्ड भी सार्वजनिक कर दिए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि रामलला के खजाने में आई चांदी का एक-एक कतरा पूरी तरह सुरक्षित है।

दान की २०० ईंटों पर जब अपनों ने ही पूछा सवाल

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब विश्व सिंधी सेवा संगम नामक संगठन ने ट्रस्ट को एक औपचारिक पत्र भेजा। इस पत्र में संगठन ने पूछा था कि २६ जनवरी २०२१ को सिंधी समाज के तमाम श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर को दान की गई २०० चांदी की ईंटें आखिर कहां हैं। संगठन का तर्क था कि इतने साल बीत जाने के बाद भी दानवीरों को न तो कोई आधिकारिक रसीद मिली और न ही यह पता चल सका कि इस भारी-भरकम चांदी का उपयोग मंदिर के गर्भगृह, चौखट या किसी अन्य निर्माण कार्य में हुआ भी है या नहीं। यह सवाल देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया, जिसके बाद ट्रस्ट को खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

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ईंटों से सिल्लियां बनने की पूरी कहानी

ट्रस्ट ने बेहद संजीदगी और पारदर्शिता के साथ इस पूरे मामले का ब्योरा देश के सामने रखा है। आधिकारिक बयान के अनुसार, दान में मिली सभी २०० चांदी की ईंटों का पूरा विवरण ट्रस्ट के मूल्यवान धातु रजिस्टर में बकायदा दर्ज किया गया था। बाद में ट्रस्ट की एक उच्च स्तरीय बैठक में सुरक्षा और प्रबंधन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। इस निर्णय के तहत दान में आई इन ईंटों और अन्य फुटकर चांदी को मिलाकर पिघलाने की प्रक्रिया शुरू की गई। पूरी पारदर्शिता बरतते हुए इसे ९९.९९ प्रतिशत शुद्धता वाली २०-२० किलोग्राम की ठोस सिल्वर बार यानी चांदी की सिल्लियों में तब्दील कर दिया गया।

स्टेट बैंक के लॉकर में कैद है रामलला की अमानत

अपने दावों को पूरी तरह सच साबित करने के लिए ट्रस्ट ने इस पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें भी जारी की हैं। इन तस्वीरों में चांदी का वजन करने से लेकर, उसे भट्टी में पिघलाने और फिर चमचमाती सिल्लियों के रूप में ढालने की पूरी कहानी साफ नजर आ रही है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ये सभी कीमती सिल्लियां भारतीय स्टेट बैंक की अयोध्या मुख्य शाखा के लॉकर में पूरी सुरक्षा के साथ जमा हैं। भविष्य में जब भी मंदिर परिसर के किसी विशेष कार्य या सजावट में चांदी की आवश्यकता होगी, तब इस सुरक्षित भंडार का उपयोग किया जाएगा।

रसीद के लिए ट्रस्ट ने आगे बढ़ाया हाथ

रसीद न मिलने की शिकायत पर भी ट्रस्ट ने बेहद व्यावहारिक रुख अपनाया है। ट्रस्ट ने विश्व सिंधी सेवा संगम से अनुरोध किया है कि वे उन सभी २०० दानदाताओं के नाम, स्थायी पते, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और ईमेल आईडी की सूची ट्रस्ट को सौंप दें। जैसे ही यह प्रामाणिक जानकारी ट्रस्ट के पास पहुंचेगी, वैसे ही हर एक श्रद्धालु के नाम पर उनकी व्यक्तिगत रसीद जारी कर सीधे उन तक पहुंचा दी जाएगी। इस त्वरित और स्पष्ट जवाब के बाद राम मंदिर को मिले दान की शुचिता पर सवाल उठाने वालों को सीधे तौर पर जवाब मिल गया है।

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