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मुजफ्फरनगर रोहाना टोल प्लाजा पर रोका गया नगीना सांसद का काफिला,तो पुलिसकर्मियों पर बरसे, इंस्पेक्टर ने जोड़े हाथ,नोकझोंक के बाद मेरठ के लिए हुए रवाना

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मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद की नगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रोहाना टोल प्लाजा पर शुक्रवार को उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद अपने काफिले के साथ सहारनपुर से मेरठ की ओर बढ़ रहे थे। इस दौरान सुरक्षा और जांच का हवाला देते हुए पुलिसकर्मियों ने चंद्रशेखर आजाद की मुख्य गाड़ी को तो टोल से निकाल दिया, लेकिन उनके पीछे आ रहीं काफिले की अन्य गाड़ियों को रोक लिया। अपने सहयोगियों की गाड़ियां रोके जाने से नाराज सांसद तत्काल अपनी गाड़ी से नीचे उतर आए और टोल पर तैनात पुलिसकर्मियों के पास पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

इंस्पेक्टर ने जोड़े हाथ, सांसद सिखाते रहे कानून का पाठ

टोल प्लाजा पर हंगामे और बहस के दौरान एक अजीब नजारा देखने को मिला, जब मौके पर तैनात इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह सांसद चंद्रशेखर आजाद के सामने हाथ जोड़े खड़े नजर आए। इस बीच सांसद उन्हें बेहद तल्ख लहजे में कानून और संवैधानिक मर्यादाओं का पाठ पढ़ाते दिखाई पड़े। खुद का बचाव करते हुए इंस्पेक्टर को कैमरे के सामने यह कहते हुए भी सुना गया कि वह एक इंस्पेक्टर हैं और इंस्पेक्टर ही रहेंगे, उन्होंने किसी को कोई गाली नहीं दी है और वह सिर्फ हाथ जोड़कर अपनी बात रख रहे हैं। इस हाईवोल्टेज ड्रामे और नोकझोंक के बाद आखिरकार पुलिस को पीछे हटना पड़ा और चंद्रशेखर आजाद का काफिला मेरठ की ओर रवाना हो गया।

मेरठ एसएसपी की अभद्र भाषा पर भड़के चंद्रशेखर, बोले- क्या सड़क किसी के बाप की है?

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इस पूरे घटनाक्रम के बाद मीडिया से मुखातिब हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मेरठ प्रशासन और वहां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मेरठ में प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ एसएसपी द्वारा जो बदसलूकी की गई है, वह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक देश में कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने एसएसपी के कथित बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जब जिले के सर्वोच्च पद पर बैठा अधिकारी यह कहे कि ‘सड़क किसी के बाप की नहीं है, गंदगी कर दी सालो ने’, तो ऐसी अभद्र भाषा पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाती है। चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शनकारियों के पास कोई हथियार नहीं था और कोई डंडेबाजी नहीं हो रही थी, तो सिर्फ नारेबाजी से डरकर एक जिम्मेदार अधिकारी ऐसा कमजोर और अशोभनीय व्यवहार कैसे कर सकता है। जो अधिकारी नारेबाजी से डर जाए, क्या भरोसा कि वह कल को जनता पर गोली नहीं चलवा देगा? उन्होंने साफ किया कि वह मेरठ जाकर एसएसपी और डीएम दोनों से मिलकर पूछेंगे कि उन्होंने ऐसा कृत्य किसके इशारे पर किया है।

आत्महत्या समाधान नहीं, अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाती है न्यायप्रिया व्यवस्था

मेरठ में पीड़ित परिवारों और जेल भेजे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने आंदोलनकारियों से एक बड़ी अपील भी की। उन्होंने कहा कि कुछ भी हो जाए, लेकिन आत्महत्या किसी समस्या का विकल्प नहीं है। इंसान को हमेशा संघर्ष का रास्ता चुनना चाहिए क्योंकि देश में अदालतें खुली हुई हैं और कानून से बड़े अधिकारी नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि जीवन एक ही बार मिला है, इसलिए अन्याय के खिलाफ डटकर लड़ना चाहिए, क्योंकि अगर प्रताड़ित व्यक्ति ही मर जाएगा तो उसकी लड़ाई कौन लड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों पर समय रहते जनता की बात न सुनने का आरोप लगाया और स्पष्ट किया कि वह पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा सुनेंगे और यदि प्रशासन ने कोई न्यायसंगत रास्ता नहीं निकाला, तो आने वाले समय में एक बड़ी रैली और बड़े संघर्ष की रूपरेखा तैयार की जाएगी। सांसद ने पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य यह है कि कोई भी निर्दोष जेल न जाए और कोई भी असली दोषी कानून की गिरफ्त से बचने न पाए।

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